त्योहारी सीजन के कारण टला प्रस्तावित फैसला, तारीख अभी तय नहीं
नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने मंगलवार को फैसला किया कि प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) फ्रेमवर्क को दीपावली के बाद लागू किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए तारीख का ऐलान किया जाना बाकी है। एनपीसीआई की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा कि यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने फैसला किया कि त्योहारों के सीजन को ध्यान में रखते हुए, चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर को दीपावली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। इसकी तारीख की घोषणा अलग से की जाएगी।
यूपीआई एमडीआर को 0.4 प्रतिशत किया था तय
यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है, जब व्यापारी संगठनों, फिनटेक और पेमेंट कंपनियों ने एनपीसीआई से यूपीआई फ्रेमवर्क के लागू होने की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था। उन्होंने त्योहारों के दौरान होने वाली अधिक बिक्री पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। पिछले महीने, यूपीआई स्टीयरिंग कमिटी ने 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजेक्शन के लिए यूपीआई एमडीआर को 0.4 प्रतिशत या 40 बेसिस पॉइंट्स तय किया था।
दस हजार रुपए के पेमेंट पर चालीस रुपए अतिरिक्त होते खर्च
एमडीआर वह फीस है, जो डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए व्यापारियों से ली जाती है। 0.4 प्रतिशत फीस का मतलब है कि हर 2,000 रुपए के खर्च पर 8 रुपए या यूपीआई से किए गए हर 10,000 रुपए के पेमेंट पर 40 रुपए का अतिरिक्त खर्च। सरकार की ओर से साफ किया जा चुका है कि यह यूपीआई एमडीआर केवल व्यापारियों से लिया जाएगा और व्यापारी इसे ग्राहकों को किसी भी तरीके से पास नहीं कर सकते हैं।
देशभर में हुआ था विरोध
सरकार के पूर्व फैसले का देशभर के कारोबारियों और विपक्षी नेताओं ने विरोध किया था। विरोध दो स्तरों पर हुआ। विपक्षी नेताओं ने राजनीतिक और आम लोगों पर असर को लेकर सवाल उठाए। वहीं कारोबारी संगठनों ने लागत बढऩे और ग्राहकों पर बोझ पडऩे की संभावना जताई थी। उनका कहना था कि इससे छोटे कारोबारियों को ज्यादा नुकसान होगा।
शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी होने की संभावना कम: मिश्रा
इससे पहले विश्व बैंक समूह के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने कहा था कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर एमडीआर की अनुमति देना एक अधिकार प्रदान करने वाला नियम होगा। हालांकि, भुगतान क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण इससे शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी होने की संभावना कम है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इससे बड़े पैमाने पर शुल्क में बढ़ोतरी होगी, क्योंकि यह एक मुक्त और प्रतिस्पर्धी बाजार है। ऐसी कंपनियां भी थीं, जो एमडीआर शुल्क नहीं ले पाने के बावजूद अपना कारोबार चलाने में सक्षम रहीं और बाजार में बनी रहीं।
व्यापारियों की चिंताओं के प्रति सरकार संवेदनशील: कैट
अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने चुनिंदा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को टालने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है। व्यापारी संगठन ने कहा कि इस कदम से व्यापारियों के हितों की रक्षा होगी और त्योहारों सीजन में डिजिटल पेमेंट के लगातार बढ़ते ट्रेंड को प्रोत्साहन मिलेगा। कैट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह फैसला सही समय पर लिया गया है, क्योंकि त्योहारी और शादियों के सीजन में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की बिक्री उच्चतम स्तर पर होती है। व्यापारी संगठन ने कहा कि यह फैसला सही समय पर और व्यावहारिक है, खासकर त्योहारों और शादियों के अहम सीजन के दौरान, जब लाखों व्यापारी और एमएसएमई ज्यादा कारोबार करते हैं।

