रुपये में गिरावट का आंकड़ा
नई दिल्ली। Reserve Bank of India (RBI) की Deputy Governor Poonam Gupta ने कहा है कि भारतीय रुपये के मौजूदा स्तर से स्थिर होने और आगे मजबूत होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2025 से 16 सितंबर 2026 तक रुपये में Point-to-Point आधार पर करीब 13.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
रुपये में सुधार की संभावना
Poonam Gupta ने SBI conclave में कहा कि Market Analysts द्वारा पहले अनुमान लगाए गए ट्रेंड के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में रुपये के केवल स्थिर होने ही नहीं, बल्कि इसके मजबूत होने का भी आधार मौजूद है। उन्होंने कहा कि Foreign Exchange Market में व्यवस्थित स्थिति बनाए रखने के लिए RBI प्रतिबद्ध है।
CAD में सुधार से मिलेगा समर्थन
RBI Deputy Governor ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत का Current Account Deficit (CAD) और कम हो सकता है। Merchandise Exports में बढ़ती सफलता, Net Services Exports और Remittances भारत की आर्थिक मजबूती के प्रमुख आधार बने हुए हैं।
उन्होंने बताया कि भारत पारंपरिक रूप से छोटा CAD और बड़ा Capital Account Surplus वाला देश रहा है, जिससे Balance of Payment (BOP) की स्थिति मजबूत रही है। भारत का CAD GDP के मुकाबले लंबे समय में कम हुआ है, जिससे बाहरी क्षेत्र में मजबूती आई है।
तेल और सोने की कीमतों का असर
Gupta ने कहा कि हाल के Oil Price और Gold Price में बढ़ोतरी के कारण CAD पर अस्थायी दबाव आया है। वहीं, 2024-25 में करीब 5 अरब डॉलर और 2025-26 में करीब 23.6 अरब डॉलर का Negative BOP दर्ज किया गया।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता से बढ़ेगी मजबूती
उन्होंने कहा कि Alternative Energy Sources और घरेलू Oil Reserves की तलाश से भारत की Imported Oil पर निर्भरता घट सकती है। इसके अलावा नए Trade Opportunities और हालिया Free Trade Agreements (FTAs) का सकारात्मक प्रभाव आने वाले समय में दिखाई देगा। बेहतर Exchange Rate और मजबूत निर्यात से रुपये को भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।

