Wednesday, August 19, 2026 |
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SEBI ने ₹.144 करोड़ के शेयर हेरफेर घोटाले में 221 संस्थाओं पर लगाया प्रतिबंध, मास्टरमाइंड हनीफ शेख 7 वर्षों के लिए बाज़ार से बाहर

by Business Remedies
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SEBI Bans 221 Entities In ₹.144 Crore Pump And Dump Scam And Bars Hanif Shekh For Seven Years

भारत के पूंजी बाज़ार नियामक SEBI ने लगभग ₹. 144 करोड़ के कथित शेयर हेरफेर घोटाले का खुलासा करते हुए 221 संस्थाओं को प्रतिभूति बाज़ार से प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही, इस पूरे मामले के कथित मास्टरमाइंड हनीफ शेख को 7 वर्षों के लिए प्रतिभूति बाज़ार से बाहर कर दिया गया है। नियामक ने अवैध रूप से अर्जित ₹. 143.79 करोड़ की राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस जमा कराने का भी आदेश दिया है।

SEBI की 394 पृष्ठों की अंतिम जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क 2017 से 2020 के बीच सक्रिय था। जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने मौरिया उद्योग, 7 एनआर रिटेल, दार्जिलिंग रोपवे कंपनी, जीबीएल इंडस्ट्रीज़ और विशाल फैब्रिक्स जैसी सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की कीमतों और कारोबार की मात्रा में कृत्रिम बढ़ोतरी की। नियामक के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में 200 से अधिक संस्थाएं शामिल थीं, जिनमें प्रत्येक की अलग-अलग भूमिका तय की गई थी। शुरुआत में जुड़े हुए कारोबारियों ने आपसी तालमेल के साथ कृत्रिम खरीद-बिक्री कर शेयरों में नकली मांग पैदा की। इससे संबंधित शेयरों की कीमत और कारोबार दोनों में तेज़ बढ़ोतरी दिखाई देने लगी।

जब शेयरों की कीमतें और कारोबार पर्याप्त स्तर तक पहुंच गए, तब इस नेटवर्क ने बड़े स्तर पर SMS अभियान चलाया। इन संदेशों के माध्यम से हजारों खुदरा निवेशकों को संबंधित शेयर खरीदने की सलाह दी गई। जांच में पाया गया कि इन संदेशों के प्रेषक नाम इस तरह बनाए गए थे कि वे प्रतिष्ठित शेयर दलाल संस्थाओं जैसे प्रतीत हों, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़े और वे इन शेयरों में निवेश करें। जैसे-जैसे खुदरा निवेशकों की खरीद बढ़ी, वैसे-वैसे इस नेटवर्क से जुड़ी अन्य संस्थाओं ने ऊंचे दामों पर अपने शेयर बेचकर भारी मुनाफा कमाया। SEBI के अनुसार, इसके बाद यह धन कई माध्यम कंपनियों, वित्तीय संस्थाओं और विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़ी संस्थाओं के जरिए घुमाया गया, ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने वाले धन का पता लगाना कठिन हो जाए।

जांच में यह भी सामने आया कि यही मध्यस्थ संस्थाएं सभी 5 कंपनियों के मामलों में बार-बार सामने आईं। इससे SEBI ने निष्कर्ष निकाला कि यह अलग-अलग घटनाएं नहीं थीं, बल्कि पूरी तरह संगठित और सुनियोजित शेयर हेरफेर अभियान था। SEBI ने इस घोटाले से अर्जित अवैध लाभ का अनुमान ₹. 143.79 करोड़ लगाया है और आदेश दिया है कि संबंधित सभी संस्थाएं यह राशि अक्टूबर 2020 से भुगतान की तिथि तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करें।

कार्रवाई के तहत हनीफ शेख को 7 वर्षों के लिए प्रतिभूति बाज़ार से प्रतिबंधित करने के साथ उन पर ₹. 10 करोड़ का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। उनसे जुड़ी 5 संस्थाओं को 6 वर्षों के लिए प्रतिभूति बाज़ार से बाहर कर दिया गया है और प्रत्येक पर ₹. 2 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। वहीं, अन्य शामिल संस्थाओं पर 5 वर्षों तक का प्रतिबंध लगाया गया है तथा उन पर ₹. 5 लाख से लेकर ₹. 1 करोड़ तक का आर्थिक दंड लगाया गया है। SEBI ने बताया कि जांच के दौरान शेयर कारोबार के रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, मोबाइल फोन का विवरण, WhatsApp बातचीत, वेबसाइट पंजीकरण संबंधी जानकारी, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, यात्रा कंपनियों तथा वित्तीय संस्थाओं से प्राप्त दस्तावेजों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। इन सभी साक्ष्यों के आधार पर हनीफ शेख की SMS अभियान संचालित करने और पूरे शेयर हेरफेर नेटवर्क का समन्वय करने में भूमिका स्थापित हुई।



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