फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड के फ्रैंकलिन इंडिया डिविडेंड यील्ड फंड ने निवेशकों के लिए संपत्ति सृजन के 20 साल पूरे कर लिए हैं। इस उपलब्धि के साथ फंड का प्रबंधनाधीन कुल निवेश (AUM) ₹.2,300 करोड़ से अधिक हो गया है। डिविडेंड यील्ड आधारित निवेश रणनीति पर चलने वाले इस फंड ने विभिन्न बाजार परिस्थितियों में निवेशकों को बेहतर और स्थिर प्रतिफल प्रदान करते हुए दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यह फंड मुख्य रूप से उन कंपनियों में निवेश करता है जिनका लाभांश वितरण का रिकॉर्ड मजबूत और लगातार रहा है। इसी रणनीति के कारण फंड ने लंबे समय में अपने मानक सूचकांक से बेहतर प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से पिछले 15 वर्षों और स्थापना से अब तक की अवधि में फंड ने Nifty Dividend Opportunities 50 Index की तुलना में अधिक प्रतिफल दिया है। फंड का उद्देश्य विभिन्न बाजार चक्रों में निवेशकों को बेहतर जोखिम-समायोजित प्रतिफल उपलब्ध कराना है। इसके लिए यह मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों का चयन करता है, जो नियमित रूप से लाभांश प्रदान करती हैं और समय के साथ अपने व्यवसाय का विस्तार करती हैं।
यदि किसी निवेशक ने फंड की शुरुआत के समय ₹.1 लाख का निवेश किया होता, तो 30 अप्रैल 2026 तक उसका निवेश बढ़कर लगभग ₹.13.60 लाख हो जाता। इस दौरान निवेशक को 13.97 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर प्राप्त होती। वहीं, यदि यही राशि Nifty 500 TRI में निवेश की गई होती, तो उसका मूल्य लगभग ₹.10.3 लाख होता और चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 12.39 प्रतिशत रहती। नियमित निवेश करने वाले निवेशकों के लिए भी फंड ने प्रभावशाली प्रदर्शन दिखाया है। यदि किसी निवेशक ने फंड की शुरुआत से हर महीने ₹.10,000 का एसआईपी किया होता, तो अप्रैल 2026 के अंत तक उसका कुल निवेश मूल्य बढ़कर ₹.1.2 करोड़ से अधिक हो जाता। यह नियमित निवेश की शक्ति और दीर्घकालिक अनुशासन के लाभ को दर्शाता है।
फंड के पोर्टफोलियो प्रबंधक राजसा काकुलवरपू ने कहा कि फंड का ध्यान ऐसी कंपनियों पर रहता है जिनका लाभांश वितरण रिकॉर्ड मजबूत हो और जो समय के साथ अपने लाभांश में वृद्धि करती रही हों। उनका कहना है कि ऐसी कंपनियां आमतौर पर आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध होती हैं और भविष्य में बेहतर मूल्य वृद्धि की संभावना रखती हैं। साथ ही, बाजार में गिरावट के दौरान ये निवेशकों के जोखिम को भी सीमित करने में मदद करती हैं। फंड की निवेश रणनीति विविधीकरण पर आधारित है। यह विभिन्न क्षेत्रों और बाजार पूंजीकरण श्रेणियों की कंपनियों में निवेश करता है। इसके अलावा अवसर मिलने पर रियल एस्टेट निवेश ट्रस्टों तथा चुनिंदा वैश्विक शेयरों में भी निवेश किया जाता है ताकि निवेश पोर्टफोलियो को अतिरिक्त मजबूती मिल सके।
फंड का निवेश बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, उपभोक्ता उत्पाद, एयरोस्पेस एवं रक्षा, वाहन उद्योग, दूरसंचार, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं तथा तेल एवं गैस जैसे प्रमुख क्षेत्रों में फैला हुआ है। फंड आमतौर पर 50 से कम शेयरों वाला संतुलित और विविधीकृत पोर्टफोलियो बनाए रखता है। अंतरराष्ट्रीय निवेश भी फंड की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। अप्रैल 2026 तक फंड की लगभग 8 प्रतिशत राशि विदेशी शेयरों में निवेशित थी। इसमें अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजार शामिल हैं। इससे निवेशकों को विभिन्न देशों के विकास अवसरों और आकर्षक मूल्यांकन का लाभ मिलता है तथा पोर्टफोलियो में अतिरिक्त विविधता आती है।
बाजार पूंजीकरण के आधार पर फंड का मुख्य फोकस बड़ी कंपनियों पर बना रहता है, हालांकि परिस्थितियों के अनुसार मध्यम और छोटी कंपनियों में भी निवेश किया जाता है। पिछले 12 महीनों में फंड का औसत निवेश आवंटन 54 प्रतिशत बड़ी कंपनियों, 11 प्रतिशत मध्यम कंपनियों और 13 प्रतिशत छोटी कंपनियों में रहा। इसके अतिरिक्त अप्रैल 2026 तक फंड ने सूचीबद्ध 4 रियल एस्टेट निवेश ट्रस्टों में भी निवेश किया हुआ था। इन निवेश ट्रस्टों में फंड का कुल आवंटन 9प्रतिशत से अधिक रहा। इससे फंड को नियमित आय और अतिरिक्त विविधीकरण का लाभ मिलता है।
पिछले 12 महीनों के दौरान फंड के पोर्टफोलियो ने औसतन 2.71 प्रतिशत डिविडेंड यील्ड प्रदान की, जो Nifty 500 Index की 1.17 प्रतिशत डिविडेंड यील्ड से काफी अधिक है। यही कारण है कि लाभांश आधारित निवेश रणनीतियां भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। निवेशक ऐसे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं जो उन्हें दीर्घकालिक पूंजी वृद्धि के साथ-साथ स्थिरता और नियमित आय की संभावना भी प्रदान करें। फ्रैंकलिन इंडिया डिविडेंड यील्ड फंड निवेशकों को ऐसे ही अवसर उपलब्ध कराता है। विभिन्न क्षेत्रों, बाजार पूंजीकरण श्रेणियों और देशों में फैला इसका निवेश पोर्टफोलियो दीर्घकालिक वृद्धि, संभावित नियमित आय और बेहतर विविधीकरण का संतुलित लाभ देने का प्रयास करता है। यही कारण है कि यह फंड उन निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है जो लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण के साथ स्थिर प्रतिफल की भी अपेक्षा रखते हैं।

