भारत का Data Centre क्षेत्र अब तेज विस्तार के नए दौर में पहुंच चुका है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल Data Centre क्षेत्र का राजस्व वर्ष 2033 तक लगभग ₹. 3,900 अरब तक पहुंच सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक, इंटरनेट आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग, 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार और स्थानीय Data संग्रहण नियम इस वृद्धि को लगातार मजबूत कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि AI आधारित Data Centre ढांचे की मांग तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2024 में करीब ₹. 50 अरब मूल्य वाला यह बाजार वर्ष 2030 तक बढ़कर लगभग ₹. 300 अरब तक पहुंच सकता है। इस दौरान क्षेत्र की वार्षिक संयुक्त वृद्धि दर 35.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अब इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती मांग नहीं बल्कि बड़े स्तर पर विस्तार योग्य, नियमों के अनुरूप और सुचारु संचालन वाला ढांचा तैयार करना है। पुराने Cooling सिस्टम पर आधारित पारंपरिक संरचनाएं आधुनिक AI कार्यभार को संभालने में कमजोर साबित हो रही हैं। नई पीढ़ी के Data Centre के लिए Liquid Cooling और उच्च क्षमता वाली बिजली वितरण प्रणाली की आवश्यकता बढ़ रही है। Digital Personal Data Protection Act 2023 लागू होने के बाद देश में स्थानीय Data संग्रहण और सुरक्षित Data संचालन की जरूरत भी तेजी से बढ़ी है। कंपनियां अब ऐसे Data Centre विकसित करने पर ध्यान दे रही हैं जो सरकारी नियमों के अनुरूप हों और सुरक्षित तरीके से जानकारी का प्रबंधन कर सकें।
के.पी.एम.जी. इंडिया के Artificial Intelligence प्रमुख के.जी. पुरुषोत्तमन ने कहा कि भारत का Data Centre क्षेत्र AI आधारित सेवाओं, इंटरनेट आधारित तकनीक और Data स्थानीयकरण की बढ़ती जरूरतों के कारण तेज विकास के चरण में पहुंच चुका है। आने वाले समय में केवल ढांचा निर्माण पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि तकनीकी क्षमता, AI तैयारी, नियमों की समझ और संचालन जवाबदेही को साथ लेकर चलने वाले मॉडल की आवश्यकता होगी।
रिपोर्ट में बताया गया कि बाजार अब अलग-अलग सेवा प्रदाताओं वाले मॉडल से हटकर एकीकृत साझेदारी मॉडल की ओर बढ़ रहा है। इसमें योजना निर्माण, निर्माण कार्य, स्थापना, संचालन और रखरखाव जैसी सभी सेवाएं एक ही जिम्मेदारी ढांचे के तहत उपलब्ध कराई जाती हैं। पर्यावरण और ऊर्जा से जुड़े ESG मानकों का प्रभाव भी निवेश पर लगातार बढ़ रहा है। कंपनियां Renewable Energy उपयोग, बिजली की बचत और टिकाऊ ढांचे पर अधिक ध्यान दे रही हैं ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
के.पी.एम.जी. इंडिया के Digital Solution विभाग के साझेदार उनैस उर्फी ने कहा कि आने वाले समय में केवल क्षमता निर्माण नहीं बल्कि मजबूत कार्यान्वयन क्षमता भी बेहद महत्वपूर्ण होगी। कंपनियां अब ऐसे Integrated Partnership मॉडल चाहेंगी जो तेज, समन्वित और बड़े स्तर पर ढांचा उपलब्ध करा सकें।

