New Delhi,
भारत का online retail क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और वर्ष 2025 में इसका कुल व्यापार मूल्य (GMV) लगभग 65 से 66 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। एक report के अनुसार, यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में हर साल 20 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ते हुए 2030 तक 170 से 180 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि देश के कुल retail खर्च में लगभग दसवां हिस्सा दर्शाएगी। Bain and Company और Flipkart की report में बताया गया है कि ई-रिटेल का कुल व्यापार मूल्य 19 से 21 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। वर्ष 2025 के दौरान macroeconomic स्थितियों में सुधार और उपभोक्ता भरोसे में वृद्धि से यह growth और तेज हुई। Private consumption growth भी बढ़कर 8 प्रतिशत (2022–24) से 10.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके पीछे GST में कटौती, income tax में राहत, महंगाई में कमी और lending rates में गिरावट जैसे प्रमुख कारण रहे।
साल के दूसरे हिस्से में तेज़ी
Report के अनुसार, वर्ष के दूसरे half में growth 22 से 24 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि 2026 की पहली तिमाही में 23 से 25 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता खर्च और discretionary spending में मजबूत सुधार हो रहा है। Quick commerce, जिसमें 30 मिनट से कम समय में delivery की जाती है, पिछले दो वर्षों में हर साल दोगुना बढ़ा है। वर्ष 2025 में इसका व्यापार मूल्य 10 से 11 अरब डॉलर तक पहुंच गया और 2030 तक इसके 65 से 70 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, पारंपरिक ई-रिटेल अभी भी इस पूरे बाजार का मुख्य आधार बना रहेगा और 2030 तक इसका हिस्सा 60 से 65 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
भारत बन रहा वैश्विक खपत का केंद्र
भारत तेजी से वैश्विक खपत का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। अगले पांच वर्षों में दुनिया की कुल बढ़ती खपत में भारत का योगदान आठ में से एक हिस्सा हो सकता है। पिछले पांच वर्षों में ई-रिटेल shoppers की संख्या दोगुनी से अधिक बढ़कर 2025 में 29 से 30 करोड़ तक पहुंच गई है। इसका कारण seller ecosystem का विस्तार और छोटे शहरों तक पहुंच बढ़ना है।
Gen Z बना सबसे बड़ा उपभोक्ता वर्ग
Gen Z यानी युवा वर्ग ई-रिटेल growth में अहम भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2025 में कुल shoppers में इनकी हिस्सेदारी 40 से 45 प्रतिशत रही और नए orders में लगभग आधा योगदान इसी वर्ग से आया। Metro शहरों में Gen Z का प्रति ग्राहक खर्च अन्य वर्गों की तुलना में 2.5 गुना तेजी से बढ़ा है। यह वर्ग lifestyle, beauty और electronics जैसे क्षेत्रों में ज्यादा सक्रिय है और social media, video content तथा instant credit जैसे माध्यमों से खरीदारी कर रहा है। Bain and Company के Partner Manan Bhasin के अनुसार, quick commerce में खरीदारी का तरीका पारंपरिक e-commerce से अलग है। इसमें ग्राहक तेजी से निर्णय लेते हैं, search ज्यादा करते हैं और checkout प्रक्रिया भी तेज होती है। आमतौर पर एक session पांच मिनट से भी कम समय का होता है, जो पारंपरिक खरीदारी समय का आधा है।

