New Delhi,
वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग की कुल आय वर्ष 2026 में 1.3 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 108 लाख करोड़ रुपये) के पार पहुंचने का अनुमान है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि पिछले दो दशकों में सबसे तेज मानी जा रही है, जिसका मुख्य कारण एआई तकनीक की बढ़ती मांग है। अनुसंधान संस्था गार्टनर की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2026 में उद्योग की आय में लगभग 64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा सकती है। इस बढ़ोतरी के पीछे एआई आधारित प्रोसेसिंग, डाटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतें प्रमुख कारण हैं। गार्टनर के वरिष्ठ विश्लेषक राजीव राजपूत ने कहा कि एआई प्रोसेसिंग, डाटा सेंटर नेटवर्किंग और ऊर्जा की उच्च मांग के कारण सेमीकंडक्टर उद्योग लगातार तीसरे वर्ष दो अंकों की वृद्धि हासिल कर सकता है।
आय में लगातार वृद्धि का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में जहां कुल आय 805.3 अरब डॉलर (करीब 66 लाख करोड़ रुपये) रहने का अनुमान है, वहीं यह 2026 में बढ़कर 1,320.2 अरब डॉलर (करीब 108 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है। इसके बाद वर्ष 2027 में यह और बढ़कर 1,554.5 अरब डॉलर (करीब 127 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने की संभावना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मेमोरी सेगमेंट की आय 2025 के 216.3 अरब डॉलर (लगभग 18 लाख करोड़ रुपये) से बढ़कर 2026 में 633.3 अरब डॉलर (करीब 52 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है, जो लगभग तीन गुना वृद्धि है। इसका मुख्य कारण मेमोरी चिप की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी है। विश्लेषण के अनुसार, डीआरएएम चिप की कीमतों में 125 प्रतिशत और एनएएनडी फ्लैश की कीमतों में 234 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। साथ ही, इन कीमतों में कोई बड़ी गिरावट वर्ष 2027 के अंत तक आने की संभावना कम है।
एआई चिप बनेगा मुख्य विकास का आधार
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2026 में कुल उद्योग आय का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा एआई से जुड़े सेमीकंडक्टर से आएगा। यही क्षेत्र उद्योग की वृद्धि का सबसे बड़ा आधार बना रहेगा।
बड़े तकनीकी निवेशक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपने खर्च में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी कर सकते हैं, जिससे एआई एक्सेलेरेटर और विशेष चिप की मांग तेजी से बढ़ेगी। हालांकि, रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि मेमोरी की बढ़ती कीमतें गैर-एआई क्षेत्रों में मांग को प्रभावित कर सकती हैं और इसमें सुस्ती वर्ष 2028 तक बनी रह सकती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि वर्ष 2026 की पहली छमाही में कीमतें ऊंची रह सकती हैं, जबकि बाद के महीनों में वृद्धि की गति कुछ धीमी हो सकती है। ऐसे में तकनीकी कंपनियों और आईटी क्षेत्र के निर्णय लेने वालों को दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों में सावधानी बरतनी चाहिए।

