Friday, March 13, 2026 |
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मजबूत कॉरपोरेट नतीजों से बाजार को समर्थन, Nifty 500 कंपनियों का मुनाफा बढ़ा

by Business Remedies
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Growth in profits of Nifty 500 companies and performance of Indian stock market

New Delhi, 

देश की बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के प्रदर्शन में चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में मजबूत सुधार देखने को मिला है। Nifty 500 सूचकांक में शामिल कंपनियों के मुनाफे में सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले आठ तिमाहियों में सबसे अधिक वृद्धि मानी जा रही है। हाल के वर्षों में यह कंपनियों के परिणामों का सबसे मजबूत दौर भी बताया जा रहा है। बजाज फिनसर्व एसेट मैनेजमेंट कंपनी की एक रिपोर्ट के अनुसार, ताजा नतीजों के मौसम में कंपनियों की लाभप्रदता में व्यापक स्तर पर सुधार दिखाई दिया है। इससे आगे चलकर शेयर बाजार को अधिक स्थिर और मजबूत आधार मिलने की संभावना बढ़ी है।

हालांकि मजबूत मुनाफे के बावजूद घरेलू शेयर बाजार लगभग 18 महीनों से सीमित दायरे में ही बना हुआ है। वैश्विक बाजारों में तेज तेजी का दौर देखने के बावजूद भारत के बाजार में उतार-चढ़ाव सीमित रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हाल के समय में देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत होने लगी है, जिससे पहले मौजूद कई चुनौतियां धीरे-धीरे कम हो रही हैं। बजाज फिनसर्व एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड में इक्विटी प्रमुख सौरभ गुप्ता ने कहा कि पिछले कुछ तिमाहियों में कंपनियों के मुनाफे की रफ्तार काफी मजबूत हुई है। उनका कहना है कि हाल का नतीजों का दौर कंपनियों की लाभप्रदता में व्यापक सुधार को दर्शाता है और इससे आगे शेयर बाजार को मजबूती मिल सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार अन्य घरेलू आर्थिक संकेतकों में भी सुधार दिखाई दिया है। कर्ज की वृद्धि दर फिर से दो अंकों में पहुंच गई है, जो मजबूत मांग और बेहतर नकदी उपलब्धता को दर्शाती है। वहीं वस्तु एवं सेवा कर में कटौती के बाद उपभोग से जुड़े संकेतकों में भी धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कुल 125 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती और बाजार में नकदी बढ़ाने के कदमों ने भी कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए कर्ज की लागत को कम करने में मदद की है। इससे आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिलने की संभावना बनी हुई है। इसके बावजूद वर्ष 2026 में कुछ नई अनिश्चितताओं ने बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ाया है। दुनिया भर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से विस्तार ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं की मांग और रोजगार पर अल्पकालिक प्रभाव को लेकर चिंताएं पैदा की हैं। इसी कारण हाल के समय में इस क्षेत्र का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। सौरभ गुप्ता ने कहा कि तकनीकी बदलाव अक्सर पारंपरिक सेवा मॉडल के लिए अनिश्चितता का दौर पैदा करते हैं, लेकिन भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों ने पहले भी ऐसे बदलावों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता दिखाई है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ा जोखिम भी बढ़ गया है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है और इनमें से लगभग आधी आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में यह मार्ग संवेदनशील माना जाता है। यदि यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो महंगाई बढ़ सकती है, रुपये पर दबाव आ सकता है और विमानन, रंग-रसायन, रसायन तथा तेल विपणन कंपनियों जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। साथ ही विदेशी निवेशकों की निकासी भी बढ़ सकती है। इस बीच सरकारी बजट और मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद ऋण बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। विदेशी निवेशकों की निकासी और भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये ने रिकॉर्ड निचले स्तर को छुआ और बांड प्रतिफल में बढ़ोतरी दर्ज की गई। बजाज फिनसर्व एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड में स्थिर आय प्रमुख सिद्धार्थ चौधरी ने कहा कि 2024 आधार वर्ष के साथ संशोधित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक श्रृंखला यह संकेत देती है कि मुख्य महंगाई दर नियंत्रित बनी हुई है। इससे नीतिगत माहौल को स्थिर बनाए रखने के पक्ष को मजबूती मिलती है। हालांकि बाद में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को फिर ऊपर धकेल दिया, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा और विशेष रूप से लंबी अवधि वाले बांड प्रतिफल में तेजी देखी गई।



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