नई दिल्ली,
भारत और यूरोपीय संघ के बीच संपन्न मुक्त व्यापार समझौते के बाद भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप का बाजार व्यापक रूप से खुल गया है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते के तहत व्यापार मूल्य के आधार पर 99 प्रतिशत से अधिक भारतीय वस्तुओं को यूरोपीय संघ में प्राथमिकता के साथ प्रवेश मिलेगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी मजबूती मिलेगी और भारतीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्राप्त होगी।
मंत्रालय ने बताया कि यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के साथ पहले से हुए समझौतों के साथ यह नया समझौता भारतीय कारोबारियों, निर्यातकों और उद्यमियों के लिए लगभग पूरे यूरोपीय बाजार के द्वार खोल देता है। इसे भारत के इतिहास के सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। इस समझौते के लागू होने के साथ ही लगभग Rs.6.41लाख करोड़ मूल्य के निर्यात को नई गति मिलने की संभावना है। इसमें से लगभग Rs.2.82लाख करोड़ के श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण को विशेष लाभ मिलेगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का निष्कर्ष भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी में एक निर्णायक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह केवल पारंपरिक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि रणनीतिक आयामों वाला व्यापक साझेदारी ढांचा है, जो संतुलित और परस्पर लाभकारी संबंधों को मजबूत करेगा।
मंत्री ने कहा कि युवा और गतिशील कार्यबल तथा तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था के बल पर भारत इस समझौते का उपयोग रोजगार सृजन, नवाचार को बढ़ावा देने और विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर खोलने के लिए करेगा। इससे वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संयुक्त रूप से इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की, जिसे दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग Rs.11.5लाख करोड़ रहा। इसमें भारत का निर्यात लगभग Rs.6.4लाख करोड़ और आयात लगभग Rs.5.1लाख करोड़ दर्ज किया गया। सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार भी लगभग Rs.7.2लाख करोड़ तक पहुंच गया।
यह समझौता विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों को निर्णायक बढ़त देगा। वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूता उद्योग, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग उत्पाद और वाहन क्षेत्र को शुल्क में कटौती का लाभ मिलेगा। लगभग 10 प्रतिशत तक के शुल्क को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा, जिससे इन क्षेत्रों के निर्यात को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होगा। वाहन क्षेत्र के लिए एक सावधानीपूर्वक कोटा-आधारित उदारीकरण पैकेज तैयार किया गया है। इससे यूरोपीय वाहन निर्माता भारत में उच्च मूल्य श्रेणी के मॉडल ला सकेंगे, साथ ही भविष्य में भारत में निर्माण और निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को उच्च तकनीक उत्पाद और बेहतर प्रतिस्पर्धा का लाभ मिलेगा। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र को भी इस समझौते से बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। चाय, कॉफी, मसाले, ताजे फल एवं सब्जियां तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे। इससे ग्रामीण आय में वृद्धि, समावेशी विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी। सरकार ने दुग्ध, अनाज, पोल्ट्री, सोयामील तथा कुछ संवेदनशील फसलों जैसे क्षेत्रों को सावधानीपूर्वक संरक्षित रखा है, ताकि घरेलू हितों और निर्यात वृद्धि के बीच संतुलन बना रहे।
सेवाओं के क्षेत्र में भी भारत को यूरोपीय संघ के 144 उप-क्षेत्रों में पूर्वानुमेय पहुंच प्राप्त होगी। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, अन्य व्यावसायिक सेवाएं और शिक्षा सेवाएं शामिल हैं। इससे भारतीय सेवा प्रदाताओं को व्यापक अवसर मिलेंगे। व्यावसायिक आवागमन के लिए भी एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया गया है, जिससे अल्पकालिक और अस्थायी यात्रा सुगम होगी। यूरोपीय संघ ने 37 क्षेत्रों में संविदात्मक सेवा प्रदाताओं और 17 क्षेत्रों में स्वतंत्र पेशेवरों के लिए प्रतिबद्धताएं दी हैं। साथ ही सामाजिक सुरक्षा समझौतों और छात्र गतिशीलता के लिए पांच वर्ष की रूपरेखा पर सहमति बनी है। यह व्यापक समझौता भारतीय उद्योग, किसानों, श्रमिकों, महिलाओं, युवाओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से गहराई से जोड़ने में सहायक होगा और भारत को विश्व व्यापार में एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करेगा।

