नई दिल्ली, 3 अक्टूबर । आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि व्यापार विवाद और वैश्विक भू-राजनीतिक झटकों के बावजूद, भारत अस्थिर दुनिया में स्थिरता का एक दुर्लभ स्तंभ बना हुआ है।
चौथे कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि नीतिगत निरंतरता, संस्थागत मजबूती और सुधार की गति ने भारत को गंभीर वित्तीय संकट से बचाने और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बने रहने में मदद की है।
📊 Key Highlights
-
भारत के macro fundamentals मजबूत: कम महंगाई, स्वस्थ विदेशी मुद्रा भंडार, कम चालू खाता घाटा, और मजबूत बैंक और कॉर्पोरेट बैलेंस शीट।
-
अमेरिका के टैरिफ विवाद और अन्य वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में अंतर।
-
RBI Governor: “आप तूफान को तो नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन नाव को सही दिशा में ले सकते हैं।”
-
पिछले दो दशकों में केंद्रीय बैंकों को वित्तीय संकट, यूरोजोन कर्ज संकट, कोरोना महामारी, यूक्रेन-रूस युद्ध और जलवायु व्यवधानों से निपटना पड़ा।
-
वैश्विक अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों तक अपनी वास्तविक क्षमता के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाएगी। उच्च टैरिफ, बढ़ता सार्वजनिक ऋण और इक्विटी मार्केट में निवेशकों की लापरवाही जोखिम बढ़ा सकती है।
-
सोने की कीमतें वैश्विक अनिश्चितता का एक बैरोमीटर बन रही हैं।

