नई दिल्ली। इंडियन रीन्युएबल एनर्जी डेवलपमेन्ट एजेंसी लिमिटेड (इरेडा) के सीएमडी प्रदीप कुमार दास ने राजस्थान बिज़नेस समिट में ‘ग्रीन ट्रांज़िशन- इनोवेटिव डेवलपमेन्ट एंड फाइनैंशियल मॉडल्स फॉर रीन्युएबल एनर्जी’ विषय पर पैनल चर्चा के दौरान अपने विचार साझा किए।
दास ने कहा कि भारत अपने हरित रूपान्तरण के तीव्र चरण में मजबूती के साथ प्रवेश कर चुका है। देश की नवीकरणीय उर्जा क्षमता जुलाई 2025 तक 237 गीगावॉट के आंकड़े को पार कर गई है और गैर-जीवाश्म ईंधन संसाधन इंस्टॉल्ड क्षमता में 50 फीसदी योगदान दे रहे हैं। वित्तीय वर्ष 25 में 60 समूहों ने यूटिलिटी पैमाने के टेंडर हासिल किए हैं, उन्होंने कहा कि 2030 तक 485 गीगावॉट के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सालाना तकरीबन 50 गीगावॉट क्षमता बढ़ानी होगी। इसके लिए घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने, समय पर ग्रिड विस्तार करने और सतत निवेश की आवश्यकता है।
उन्होंने वैश्विक एवं घरेलू पूंजी प्रवाह में निर्णायक बदलाव पर रोशनी डाली, उन्होंने कहा कि नवीकरणीय उर्जा को अब मुख्यधारा विकास क्षेत्र के रूप में देखा जाता है। ओवरसब्सक्राइब्ड आईपीओ, बढ़ती रीटेल भागीदारी और रिकॉर्ड एफडीआई प्रवाह (तीन सालों में ढाई गुना बढ़ोतरी) से साफ है कि भारत की स्वच्छ उर्जा की कहानी में निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।
श्री दास ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस संवेग को बनाए रखने के लिए तीव्र ऋण मूल्यांकन; पूर्ण नवीकरणीय उर्जा मूल्य श्रृखला को आधुनिक फाइनैंस मॉडलों के साथ फाइनैंस करने; नीति निर्माताओं, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निवेशकों एवं उद्योग जगत के लीडरों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है ताकि परियोजना की योजना बनाने से लेकर इसका संचालन शुरू होने तक पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके और भारत 2030 के स्वच्छ उर्जा लक्ष्यों की ओर अग्रसर हो सके।
इरेडा के सीएमडी ने माननीय मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित राउण्डटेबल ‘पावरिंग द फ्यूचरः इन्वेस्टमेन्ट एंड फाइनैंसिंग पैथवेज़ फॉर रीन्युएबल एनर्जी इन राजस्थान’ में भी हिस्सा लिया। इस चर्चा के दौरान परियोजनाओं के जोखिम कम करने तथा स्वच्छ उर्जा की तैनाती को गति प्रदान करने के लिए सार्वजनिक उपक्रमों के नेतृत्व में योजनाओं पर ध्यान केन्द्रित किया गया।


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