हाल के दिनों में धार्मिकस्थलों और तीर्थस्थलों पर भगदड़ में श्रद्धालुओं की मौतों की घटनाएं बार-बार हो रही हैं। हालांकि, एक के बाद एक कई हादसों के बावजूद, यह सवाल बना हुआ है कि प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर एहतियाती कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। ताजा हादसा हरिद्वार के मनसा मंदिर का है। रविवार सुबह मनसा देवी मंदिर की सीढिय़ों पर किसी ने चिल्लाकर कहा कि तार में करंट दौड़ गया है और किसी को बिजली का झटका लगा है और इस अफवाह की पुष्टि किए बिना ही भगदड़ मच गई। अनजाने डर से श्रद्धालु एक-दूसरे को कुचलते हुए भाग निकले। कुछ मिनटों तक चली भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की कुचलकर मौत हो गई, जबकि 35 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। भीड़ में कुचले जाने और सांस लेने में तकलीफ होने के कारण श्रद्धालु बेहोश हो गए।
मंदिर तक पहाड़ी पर बनी 800 सीढिय़ों से पहुंचा जा सकता है। हाल ही में हुई बारिश के कारण रास्ता और उस पर बनी सीढिय़ां फिसलन भरी हो गई थीं। दुर्घटना इन्हीं सीढिय़ों पर हुई। 800 में से 775 सीढिय़ां श्रद्धालु चढ़ चुके थे। चढऩे के लिए केवल 25 सीढिय़ां शेष थीं, भीड़ में से किसी ने सहारे के लिए सीढिय़ों के पास एक तार पकड़ लिया। किसी ने चिल्लाकर कहा कि तार में करंट दौड़ गया है और किसी को बिजली का झटका लगा है और इस अफवाह की पुष्टि किए बिना ही भगदड़ मच गई। हालांकि, तार में बिजली नहीं थी और इसलिए किसी को बिजली का झटका लगने का सवाल ही नहीं था। लेकिन जब तक यह सच्चाई समझ में आती, तब तक भयानक भगदड़ मच गई और जब सीढिय़ों पर अफरा-तफरी मची हुई थी, लेकिन मंदिर प्रबंधन या पुलिस प्रशासन ने तुरंत कोई कदम नहीं उठाया। अगर पुलिस और प्रशासन ने मंदिर के लाउडस्पीकर पर इस अफवाह का तुरंत खंडन किया होता, तो भी भगदड़ की यह दुर्घटना आसानी से टल सकती थी।

