Sunday, March 8, 2026 |
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महिला सशक्तिकरण में बढ़ता भारत

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला उद्यमियों और समाज सेविकाओं के विचार

by Business Remedies
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कुंजेश कुमार पतसारिया | बिजनेस रेमेडीज/Jaipur। स्टार्टअप्स से लेकर अंतरिक्ष क्षेत्र और खेलों से लेकर रक्षा क्षेत्र तक, हमारी बेटियां हर क्षेत्र में चमक रही हैं। आज हर कोई भारत में महिलाओं की शक्ति को पहचान रहा है। जहां भारत की टॉप पांच महिला उद्यमियों ने दुनिया में अपना नाम कमाया है। भारत महिला सशक्तिकरण ‘महिला विकास’ से ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ की ओर तेजी से बढ़ रहा है। जहां वर्ष, 2023-24 में महिला कार्यबल भागीदारी दर बढक़र 41.7 फीसदी हो गई है और स्वरोजगार 67.4 फीसदी तक पहुंच गया है। सरकार मुद्रा योजना, नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। आज की महिलाओं का कोई सानी नहीं है, हर क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रही है। भारत अब महिलाओं को केवल योजनाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को रफ्तार देने वाली मुख्य शक्ति के रूप में देख रहा है। यह बदलाव ग्रामीण उद्योगों से लेकर स्टार्टअप्स और शासन के हर स्तर पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के विशेष अवसर पर बिजनेस रेमेडीज की टीम ने महिला उद्यमियों और समाज सेविकाओं से जाने विचार।

“भारत के mutual fund निवेशकों में 26 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह संख्या तब तक छोटी लगती है जब तक आप यह नहीं देखते कि वे वास्तव में अपने पैसे का क्या कर रही हैं। निवेशकों के तौर पर महिलाएं लगातार पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन करती हैं। और यह कोई मामूली अंतर नहीं है — हम साल-दर-साल 40 basis points ज्यादा रिटर्न की बात कर रहे हैं। 20, 30 सालों में यह पीढिय़ों तक चलने वाली संपत्ति बन जाती है। ऐसा क्यों होता है? क्योंकि महिलाएं ऐसे ट्रेड नहीं करतीं जैसे वे कोई खेल खेल रही हों। जब बाजार गिरता है तो वे घबराती नहीं हैं। वे अगले ‘hot stock’ के पीछे नहीं भागती हैं। वे निवेश करती हैं, उसे hold करती हैं, और उसे बढऩे देती हैं। कोई ड्रामा नहीं। सिर्फ अनुशासन। मैंने जिस भी सफल निवेशक के बारे में पढ़ा है, वह बिल्कुल इसी रणनीति का पालन करता है। धैर्य। लंबी अवधि की सोच। हर दिन अपना portfolio चेक न करना। बाजार को time करने की कोशिश न करना। बस निरंतरता दिखाना और अपने रास्ते पर डटे रहना। फिर भी किसी न किसी तरह, निवेश के मामले में महिलाएं अभी भी अल्पसंख्यक हैं। इसलिए नहीं कि वे इसे समझती नहीं हैं। इसलिए नहीं कि वे अक्षम हैं। बल्कि इसलिए क्योंकि पूरी व्यवस्था यह मानकर बनाई गई थी कि हर कोई किसी और की तरह निवेश करता है।

मेरा यह मानना है: महिलाओं को यह सीखने की जरूरत नहीं है कि बेहतर निवेश कैसे किया जाए। बाजार पहले से ही जानता है कि वे जीत रही हैं। जिसे बदलने की जरूरत है, वह है ecosystem — उत्पाद, सलाह और पहुंच — इन्हें वास्तव में वहां तक पहुंचने की जरूरत है जहां वे (महिलाएं) हैं। इस महिला दिवस पर, शायद यह समय आ गया है कि हम महिलाओं को किसी सांचे में ढलने के लिए कहना बंद करें, और एक ऐसा सांचा बनाना शुरू करें जो वास्तव में उन पर फिट बैठता हो।”

Madhu Lunawat, संस्थापक, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, The Wealth Company Mutual Fund

महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार की ओर से बहुत सारी सुविधाएं दी जा रही हैं। आज सोसाइटी में भी हम high scale पर female को आगे लाने में बढ़े हैं। पर आज भी rural area में mindset नहीं होने से महिला सशक्तिकरण में आगे नहीं बढ़ पाए हैं, कुछ क्षेत्रों में तो ग्रामीण इलाकों में महिलाएं आगे बढ़ी है। बहुत सारी संस्थाएं हैं, जो उन्हें आगे बढ़ाने में प्रयासरत है, पर महिलाओं स्वयं ही आगे बढक़र महिला सशक्तिकरण के लिए प्रयास करने होंगे। पहले से हम ratio देंखे तो महिलाएं financial भी मजबूत हुई हैं। बड़े scale पर आज भी महिलाओं के समक्ष कई चुनौतियां हैं, लेकिन छोटे scale पर वह अच्छा काम कर सकती हैं।

Neelam Mittal, अध्यक्ष, FORTI Woman Wing

महिला सशक्तिकरण केवल समानता की बात नहीं, बल्कि अवसर और आत्मविश्वास देने की प्रक्रिया है। Hopeweavers Foundation के माध्यम से हमारा प्रयास है कि महिलाएं शिक्षा, कौशल और जागरूकता के साथ आत्मनिर्भर बनें। जब एक महिला सशक्त होती है, तो उसका पूरा परिवार और समाज आगे बढ़ता है। हमारा विश्वास है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकती हैं। समाज के विकास के लिए महिलाओं का सशक्त होना अत्यंत आवश्यक है।

Anjana Jain, निदेशक, Hopeweavers Foundation

 

 

महिला दिवस पर हमारी जो महिला शक्ति है, उन सभी को बधाई। महिलाओं को अपनी शक्ति पहचानना जरूरी है। महिला अन्नपूर्णा है, वह पूरे विश्व का पालन करती है। साथ ही management कैसे करना है? यह लोगों को समझाती है। महिला ही है, जो हर आयाम पर, हर मुकाम पर सफलता से आगे बढ़ सकती है। यही वह चीज है, जिससे वे समझदारी से अपने परिवार को आगे बढ़ाती हैं। इसके अलावा working women है, वे बाहर जाकर अपने परिवार को financial support करती हैं। आज की स्थिति महिलाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं, साथ ही अन्य महिलाओं को सशक्त बनाना चाहिए। साथ ही आज के आधुनिक समय में महिलाओं की उन्नति के पीछे भी पुरुषों का हाथ है। पुरुष लगातार महिलाओं को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं।

Nidhi Khandelwal, पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष, Rajasthan High Court

शिक्षा में महिलाओं को सशक्तबनाना केवल व्यक्तिगत अवसरों तक ही सीमित नहीं है, इससे परिवारों, समुदायों और समाजों को नया आकार मिलता है। जब महिलाओं को शिक्षा और नेतृत्व के समान अवसर मिलते हैं, तो उनके नागरिक जीवन में सक्रिय भागीदारी, निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रभाव और सामाजिक एवं लैंगिक मान्यताओं को चुनौती देने की संभावना बढ़ जाती है। इसके लाभ पीढिय़ों तक पहुंचते हैं वहीं शिक्षित महिलाएं विशेष रूप से बच्चों और हाशिए पर पड़े समूहों की शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण में निवेश करती हैं। इन सकारात्मक प्रभावों से अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होती हैं, सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होते हैं और अधिक समावेशी एवं लचीले समुदाय बनते हैं। इसलिए, शिक्षा में संतुलन केवल परिसर में निष्पक्षता तक ही सीमित नहीं है, यह व्यापक सामाजिक परिवर्तन को दर्शाता है।

Pearl Subban, Associate Professor (Associate Dean – Equity and Inclusion), Monash University

महिलाएं अब शिक्षा प्रणाली में केवल भागीदार नहीं हैं, बल्कि वे सक्रिय रूप से इसकी दिशा, दृष्टिकोण और प्रभाव को आकार दे रही हैं। नेतृत्व भूमिका निभाने से लेकर संस्थागत रणनीति और नीति को प्रभावित करने तक, आज महिलाएं शिक्षा में नेतृत्व की नई परिभाषा दे रही हैं। अकादमिक उत्कृष्टता को सहानुभूति, समावेशिता और सामुदायिक भागीदारी के साथ जोडऩे की उनकी क्षमता संस्थानों को अधिक उत्तरदायी और भविष्य के लिए तैयार स्थानों में बदल रही है। इस महिला दिवस पर, हमें प्रतिनिधित्व का जश्न मनाने से आगे बढक़र अधिकार को सशक्त बनाने, सुरक्षित मार्ग बनाने, समान अवसर प्रदान करने और नेतृत्व मंच तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इससे महिलाएं शिक्षा के हर स्तर पर सार्थक परिवर्तन ला सकेंगी।

Dr Pooja Jain, निदेशक, JIMS Rohini

सशक्त महिलाएं अवसरों का इंतजार नहीं करतीं बल्कि वे उन्हें स्वयं बनाती हैं। वे आगे बढ़ते हुए दूसरों को सहारा देती हैं, कमजोर समय में भी दबंग आवाज में भी बोलती हैं और हर दिन यह साबित करती हैं कि शक्ति का कोई लिंग नहीं होता। आओ शक्ति, दृढ़ता और बढ़ती महिलाओं का जश्न मनाएं।

Jyoti Jain, पुरुष परिधान designer, Jaipur

 

“महिलाएं हमेशा से ही जिम्मेदारियों को संतुलित करते, बाधाओं को पार करते और दृढ़ता एवं सहानुभूति के साथ भविष्य को आकार देते हुए प्रगति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हमें उनकी इस यात्रा का जश्न मनाने और उनकी आकांक्षाओं को निरंतर समर्थन देने की याद दिलाता है।”

Harshita Garg

भारत की टॉप 5 महिला उद्यमी

  1. Savitri Jindal – 3660 करोड़ रुपए – चेयरपर्सन, OP Jindal Group
  2. Rekha Jhunjhunwala – 800 करोड़ रुपए – निवेशक, Titan Company Limited और अन्य कंपनियों में निवेशक
  3. Renuka Jagtiani – 560 करोड़ रुपए – चेयरवूमेन, Landmark Group
  4. Vinod Gupta – 470 करोड़ रुपए – मालिक, Havells
  5. Smita Krishna-Godrej – 350 करोड़ रुपए – सदस्य, Godrej Group


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