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जनवरी में UPI लेनदेन में 28 प्रतिशत की तेज बढ़त, 21.70 अरब ट्रांजेक्शन दर्ज

by Business Remedies
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UPI digital payment transaction growth report January data

New Delhi,

देश में डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI ने जनवरी महीने में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में UPI के कुल लेनदेन की संख्या 21.70 अरब रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक है। वहीं लेनदेन की कुल राशि 21 प्रतिशत की वार्षिक बढ़त के साथ Rs.28.33 लाख करोड़ पर पहुंच गई। महीने दर महीने आधार पर भी UPI के लेनदेन की संख्या और कुल राशि में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। जनवरी में औसत दैनिक लेनदेन राशि Rs.91,403 करोड़ रही, जो दिसंबर में Rs.90,217 करोड़ थी। इसी प्रकार जनवरी में प्रतिदिन औसतन 700 मिलियन लेनदेन दर्ज किए गए, जबकि दिसंबर में यह संख्या 698 मिलियन थी।

दिसंबर महीने में भी UPI ने मजबूत प्रदर्शन किया था। उस दौरान कुल 21.63 अरब लेनदेन दर्ज हुए थे, जो वर्ष दर वर्ष आधार पर 29 प्रतिशत अधिक थे। दिसंबर में कुल लेनदेन राशि Rs.27.97 लाख करोड़ रही थी, जो 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि को दर्शाती है। तत्काल धन अंतरण प्रणाली IMPS के माध्यम से दिसंबर में कुल Rs.6.62 लाख करोड़ के लेनदेन हुए, जो एक वर्ष पहले की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक थे। नवंबर में यह राशि Rs.6.15 लाख करोड़ रही थी।

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में सक्रिय UPI क्यूआर कोड की संख्या 709 मिलियन तक पहुंच गई है, जो जुलाई 2024 के बाद से 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। किराना दुकानों, दवा दुकानों, परिवहन केंद्रों और ग्रामीण बाजारों में क्यूआर कोड की व्यापक उपलब्धता ने स्कैन एंड पे को देशभर में सामान्य भुगतान माध्यम बना दिया है। व्यक्ति से व्यापारी यानी P2M लेनदेन ने व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P लेनदेन की तुलना में अधिक बढ़त दर्ज की है, जिससे खुदरा भुगतान में UPI की मजबूत पकड़ स्पष्ट होती है। P2M लेनदेन 35 प्रतिशत बढ़कर 37.46 अरब हो गए, जबकि P2P लेनदेन 29 प्रतिशत बढ़कर 21.65 अरब रहे।

औसत टिकट आकार घटकर Rs.1,262 रह गया, जो पहले Rs.1,363 था। यह दर्शाता है कि छोटे भुगतानों जैसे यात्रा, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय खरीदारी में UPI का उपयोग तेजी से बढ़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की दूरी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित हुई है और भारत वैश्विक डिजिटल शक्ति के रूप



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