जयपुर, 13 जनवरी:स्पीकिंग टाइगर बुक्स अपनी सीज़न की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक ‘ए स्टेट्समैन एंड ए सीकर: द एक्स्ट्राऑर्डिनरी लाइफ एंड लेगेसी ऑफ डॉ. करण सिंह’ को 15 जनवरी 2026 को प्रतिष्ठित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में लॉन्च करने जा रही है। इस आधिकारिक जीवनी के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हरबंस सिंह हैं।
यह पुस्तक भारत की सबसे सम्मानित सार्वजनिक हस्तियों में से एक—राजनेता, विद्वान, मानवतावादी और आध्यात्मिक साधक डॉ. करण सिंह—के असाधारण जीवन और विरासत को गहराई से सामने लाती है। डॉ. करण सिंह की यात्रा न केवल जम्मू-कश्मीर के ऐतिहासिक बदलावों से जुड़ी रही है, बल्कि आज़ादी के बाद भारत के राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास की कहानी भी कहती है।
पुस्तक का लोकार्पण जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के फर्स्ट एडिशन सत्र में किया जाएगा। इस अवसर पर जेएलएफ की निदेशक नमिता गोखले, विलियम डेलरिम्पल और संजॉय के. रॉय मौजूद रहेंगे। लॉन्च के बाद डॉ. करण सिंह, लेखक हरबंस सिंह और प्रकाशक रवि सिंह पुस्तक पर चर्चा करेंगे।
हालाँकि यह पुस्तक की पहली सार्वजनिक प्रस्तुति होगी, लेकिन इसे देशभर के पाठकों के लिए आधिकारिक रूप से 10 फरवरी 2026 को जारी किया जाएगा।
पुस्तक के बारे में:
डॉ. करण सिंह महज़ 18 वर्ष के थे जब उन्होंने एक गंभीर और रहस्यमयी बीमारी से उबरने के बाद राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1949 में राजनीतिक जीवन में प्रवेश से पहले उन्हें बीमारी के चलते एक वर्ष से अधिक समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा। उसी दौरान उनके पिता, जम्मू-कश्मीर के अंतिम महाराजा, भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर राज्य छोड़कर चले गए और डॉ. करण सिंह को रीजेंट नियुक्त किया गया।
इसके बाद के 18 वर्षों में डॉ. करण सिंह ने जम्मू-कश्मीर को एक आधुनिक लेकिन जटिल लोकतांत्रिक व्यवस्था की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। वे पहले रीजेंट बने, फिर सद्र-ए-रियासत और अंततः राज्य के गवर्नर रहे।
1967 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के गवर्नर पद से इस्तीफा देकर इंदिरा गांधी की सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। वे भारत के सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्रियों में शामिल रहे और पर्यटन एवं विमानन, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का नेतृत्व किया। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका में भारत के राजदूत, इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (ICCR) के अध्यक्ष, राज्यसभा सदस्य, ऑरोविले फाउंडेशन के चेयरमैन और यूनेस्को के कार्यकारी बोर्ड के सदस्य के रूप में भी सेवाएं दीं।
राजनीतिक जीवन के साथ-साथ डॉ. करण सिंह हिंदू दर्शन के प्रख्यात विद्वान रहे हैं और पांच दशकों से अधिक समय तक अंतर-धार्मिक संवाद को बढ़ावा देते रहे हैं। उन्होंने दार्शनिक और आध्यात्मिक साधक के रूप में भी जीवन के गहरे प्रश्नों की खोज की।
गहन शोध पर आधारित और संतुलित दृष्टिकोण से लिखी गई यह जीवनी डॉ. करण सिंह के जीवन और विरासत को अभूतपूर्व विस्तार और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है। पुस्तक में जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, शेख अब्दुल्ला, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, जे.आर.डी. टाटा, अटल बिहारी वाजपेयी, राजीव गांधी, एल्डस हक्सले तथा आध्यात्मिक गुरुओं श्री कृष्णप्रेम और श्री माधव आशीष जैसी विभूतियों के साथ उनके संवादों और संबंधों का भी उल्लेख है।
94 वर्ष की आयु में भी डॉ. करण सिंह भारत की सबसे विशिष्ट और सम्मानित हस्तियों में गिने जाते हैं—एक ऐसे राजनेता और विचारक, जिन्हें अक्सर “भारत के सबसे अच्छे राष्ट्रपति, जो कभी राष्ट्रपति नहीं बने” के रूप में याद किया जाता है। यह पुस्तक उनके जीवन और समय का वह गहन मूल्यांकन प्रस्तुत करती है, जो पहले कभी नहीं किया गया।
लेखक के बारे में:
हरबंस सिंह का जन्म जम्मू-कश्मीर के सांबा (जम्मू क्षेत्र) में हुआ। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कॉलेज प्रोफेसर के रूप में की और बाद में पत्रकारिता में कदम रखा। उन्होंने ऑब्ज़र्वर ऑफ बिज़नेस एंड पॉलिटिक्स, द ट्रिब्यून और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम किया है। वे हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में लिखते हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में तीन खंडों वाली ‘ए मॉडर्न हिस्ट्री ऑफ जम्मू एंड कश्मीर’ और हिंदी में लिखी गई ‘सूफी, सत्ता और समाज’ शामिल हैं।




