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कैबिनेट ने Union Budget 2026-27 को दी मंजूरी

संसद में पेश करेंगी वित्त मंत्री

by Business Remedies
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Finance Minister Nirmala Sitharaman carrying Digital Budget Tablet before presenting Union Budget 2026-27

नई दिल्ली,

केंद्र सरकार की कैबिनेट ने रविवार को संसद भवन में आयोजित बैठक में Union Budget 2026-27 को मंजूरी दे दी। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुबह 10 बजे संपन्न हुई। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद के लिए रवाना हुईं, जहां वह लोकसभा में बजट पेश करेंगी। बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उन्हें डिजिटल बजट की प्रति सौंपी। राष्ट्रपति भवन पहुंचने पर राष्ट्रपति ने परंपरा के अनुसार उन्हें ‘दही-चीनी’ खिलाकर शुभकामनाएं दीं। इस दौरान वित्त मंत्री अपने पारंपरिक ‘बही-खाता’ के साथ नजर आईं, जिसमें लाल रंग के कपड़े में लिपटा एक डिजिटल टैबलेट रखा था। इस पर सुनहरे रंग का राष्ट्रीय प्रतीक अंकित था।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंता नागेश्वरन, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष रवि अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी वित्त मंत्री के साथ मौजूद रहे। निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार Union Budget पेश करने जा रही हैं। वर्ष 2021 से उन्होंने कागजी दस्तावेजों के स्थान पर डिजिटल टैबलेट का उपयोग शुरू किया था, जिससे आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था को बढ़ावा मिला। इस वर्ष वित्त मंत्री ने तमिलनाडु की गहरे मैरून रंग की कांजीवरम साड़ी धारण की, जिस पर सुनहरे रंग की महीन डिजाइन और विपरीत रंग की बॉर्डर थी। इसके साथ उन्होंने पीले रंग का ब्लाउज पहना।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि Union Budget 2026-27 में आर्थिक वृद्धि की गति को बनाए रखने और राजकोषीय संतुलन को साधने के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण उत्पन्न चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बजट में पूंजीगत व्यय पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की संभावना है, ताकि दीर्घकालिक विकास को मजबूती मिल सके। पिछले वित्त वर्ष का बजट जहां मध्यम वर्ग को कर राहत देकर उपभोग बढ़ाने पर केंद्रित था, वहीं इस बार उपभोग को बढ़ावा देने की नीति अधिक चयनात्मक हो सकती है। सरकार संतुलित विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे सकती है।



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