बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। एयर कंडीशनर (एसी) उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना ‘पास पलटने’ वाली साबित हो रही है। पैनासोनिक लाइफ सॉल्यूशंस इंडिया के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि इस योजना के डेढ़ साल के भीतर घरेलू मूल्यवर्धन का अनुपात 25 प्रतिशत से बढक़र 45 प्रतिशत हो गया है। पैनासोनिक लाइफ सॉल्यूशंस के भारत और दक्षिण एशिया के चेयरमैन मनीष शर्मा ने कहा कि एयर-कंडीशनर के लिए पीएलआई योजना का एकमात्र उद्देश्य कलपुर्जों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करके वित्त वर्ष 2027-28 तक मूल्यवर्धन को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करना है। उन्होंने कहा कि एक साल से कुछ अधिक समय में ही यह 25 बढक़र 45 हो गया है। तो, यह बदलाव है, जो हो रहा है, और यही कारण है कि मुझे लगता है कि पीएलआई एक पासा पलटने वाली योजना साबित हो रही है, विशेष रूप से एयर कंडीशनर उद्योग के लिए। शर्मा उद्योग मंडल फिक्की की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण समिति के प्रमुख भी हैं। शर्मा ने कहा कि हीट एक्सचेंजर, कंप्रेसर और अन्य कलपुर्जों में निवेश आना शुरू हो गया है। ये एयर कंडीशनर के लिए पीएलआई योजना का हिस्सा हैं। सभी आवेदकों ने भौतिक ढांचे में निवेश किया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह लगभग 18 महीने की रिकॉर्ड अवधि में हासिल हुआ है।’’ नवंबर 2021 में, सरकार ने फ्रिज, एसी (व्हाइट गुड्स) बनाने वाली 42 कंपनियों का पीएलआई योजना के लिए चयन किया था। इनमें से 26 कंपनियों ने एयर-कंडीशनर कलपुर्जों के लिए 3,898 करोड़ रुपये का निवेश किया है। वहीं 16 कंपनियों ने एलईडी कलपुर्र्जां के निर्माण के लिए 716 करोड़ रुपये का निवेश किया है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना की घोषणा बहुत कम समय में की गई थी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उद्योग ‘उचित सहमति’ के साथ प्रस्ताव बनाने के लिए एक साथ आया था। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार की प्रतिक्रिया भी काफी तेज थी। उद्योग ने भी उतनी ही तेज गति से जवाब दिया।’’’




