मुंबई | बीआर न्यूज नेटवर्क
भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को 905.01 अंक यानी 1.24त्न की तेजी के साथ 74,151.04 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 237.90 अंक यानी 1.05त्न बढक़र 22,936.75 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निवेशकों ने विभिन्न सेक्टरों के शेयरों में खरीदारी की। रियल्टी, एफएमसीजी और पीएसयू बैंक सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बढ़त रही। जानकारों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को समर्थन मिला। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी जैसे जोखिम अभी बने हुए हैं।
रियल्टी और एफएमसीजी में सबसे ज्यादा तेजी
सेक्टरवार प्रदर्शन में निफ्टी रियल्टी 2.75% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा। निफ्टी एफएमसीजी में 2.34% और निफ्टी पीएसयू बैंक में 2.20% की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी सर्विसेज 1.61%, निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.24%, निफ्टी इन्फ्रा 1.18%, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.18%, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.17% और निफ्टी पीएसई 1.15% बढ़त के साथ बंद हुए। प्रमुख सूचकांकों में केवल निफ्टी ऑटो में 0.24% की गिरावट रही। जानकारों के मुताबिक, मजबूत उपभोक्ता मांग के कारण एफएमसीजी शेयरों में खास तेजी देखने को मिली।
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में अदाणी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, पावर ग्रिड, इटरनल, बजाज फाइनेंस, एचयूएल, एसबीआई, टाइटन, एनटीपीसी, बीईएल, इन्फोसिस, आईटीसी, भारती एयरटेल, एमएंडएम, एलएंडटी, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक, एचसीएल टेक और बजाज फिनसर्व बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं, ट्रेंट, मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा और एचडीएफसी बैंक गिरावट के साथ बंद हुए। फाइनेंशियल, आईटी, रियल्टी और पावर सेक्टर में मजबूती ने बाजार को समर्थन दिया।
फेड की नीति और संस्थागत निवेशकों से मिला सहारा
बाजार के जानकारों ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करने, कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी और संस्थागत निवेशकों की दोबारा खरीदारी से बाजार में तेजी आई। हाल में विदेशी निवेशकों की खरीदारी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के लगातार समर्थन से बाजार में नकदी की उपलब्धता बेहतर हुई है। कंपनियों की कमाई में लचीलापन और घरेलू मांग में स्थिरता भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि, इनपुट लागत में बढ़ोतरी से कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
वैश्विक जोखिमों पर रहेगी नजर
बाजार में सकारात्मक रुझान के बावजूद ब्रेंट कू्रड की ऊंची कीमतें, रुपये में कमजोरी, घरेलू बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता प्रमुख जोखिम बने हुए हैं। वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव और कंपनियों की लागत में बढ़ोतरी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में आने वाले समय में घरेलू मांग, कंपनियों की कमाई, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक संकेतों पर बाजार की नजर रहेगी।

