Tuesday, October 20, 2026 |
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बुराई पर अच्छाई की जीत है विजयादशमी महापर्व

by Business Remedies
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भारत पर्वों और परंपराओं का देश है, जहां हर त्योहार अपने भीतर कोई न कोई गहरा संदेश समेटे हुए है। विजयादशमी यानि दशहरा ऐसा ही महापर्व है, जो हमें बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है। यह पर्व केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में व्याप्त बुराइयों को पहचानकर उनका अंत करने की प्रेरणा भी देता है। इसकी वास्तविक सार्थकता तभी है, जब हम इसके आदर्शों को अपने आचरण में उतारें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया था। वहीं, मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय भी इसी पर्व के महत्व को रेखांकित करती है। ये दोनों प्रसंग बताते हैं कि अन्याय, अहंकार और अत्याचार चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंतत: विजय सत्य और धर्म की ही होती है। यही कारण है कि दशहरा सदियों से भारतीय जनमानस में उत्साह, आस्था और सकारात्मकता का संचार करता आया है। आज के दौर में इस पर्व का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। समाज में भ्रष्टाचार, हिंसा, भेदभाव, असहिष्णुता, लालच और स्वार्थ जैसी बुराइयां अनेक समस्याओं को जन्म दे रही हैं। ऐसे में केवल पुतलों का दहन कर देना पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने भीतर मौजूद क्रोध, अहंकार, ईष्या और द्वेष जैसे विकारों पर भी विजय प्राप्त करें। जब तक व्यक्तिअपने आचरण में बदलाव नहीं लाएगा, तब तक समाज में वास्तविक परिवर्तन की कल्पना अधूरी रहेगी। विजयादशमी हमें यह भी सिखाती है कि शक्ति का उपयोग दूसरों को दबाने के लिए नहीं, बल्कि कमजोरों की रक्षा और न्याय की स्थापना के लिए होना चाहिए। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और आदर्शों का प्रतीक है। उनके आदर्शों को अपनाकर ही परिवार, समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाया जा सकता है। इस पर्व पर रावण के पुतले के साथ हमें अपने भीतर की बुराइयों को भी समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए। बच्चों और युवाओं को सत्य, सदाचार, सहिष्णुता तथा नैतिक मूल्यों की शिक्षा देना भी समय की आवश्यकता है। समाज में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव को बढ़ावा देकर ही हम इस पर्व के उद्देश्य को सार्थक कर सकते हैं। विजयादशमी का वास्तविक उत्सव तभी होगा, जब सत्य हमारे विचारों में, सदाचार हमारे व्यवहार में और न्याय हमारे निर्णयों में दिखाई देगा। आइए, इस पर्व पर संकल्प लें कि हम बुराई के सामने झुकेंगे नहीं, अन्याय का समर्थन करेंगे नहीं और अच्छाई का मार्ग छोड़ेंगे नहीं। यही विजयादशमी का संदेश है और यही एक बेहतर समाज की नींव भी।



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