15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता
भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद
नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
भारत की मजबूत आर्थिक विकास दर और भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) नॉर्वे के निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है। उद्योग जगत के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर, फाइनेंशियल सर्विसेज और डिजिटल इकोनॉमी में निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं। भारत की घरेलू मांग, नीतिगत सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को नई दिशा दे सकता है।
भारत की आर्थिक वृद्धि से निवेशकों को उम्मीद
ईवाई इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 2030 तक औसतन 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। दशक के अंत तक भारत के दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू मांग, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और कारोबार सुगमता के लिए किए जा रहे सुधार भारत को नॉर्वे के निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना रहे हैं।
समझौते से निवेश और रोजगार को बढ़ावा
अक्टूबर 2025 से लागू भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य व्यापार उदारीकरण, निवेश प्रवाह और उन्नत प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाना है। समझौते के तहत 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता है। इससे भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। यह मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत की स्थिति मजबूत करने के लक्ष्य के अनुरूप है।
मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी में साझेदारी
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता नॉर्वे की तकनीकी विशेषज्ञता और पूंजी को भारत के विशाल बाजार से जोडऩे का अवसर देता है। प्रमुख क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, तेल एवं गैस, समुद्री सेवाएं और समुद्री खाद्य प्रसंस्करण शामिल हैं। इसके अलावा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), फिनटेक और फाइनेंशियल सर्विसेज में भी सहयोग बढ़ सकता है। टीईपीए से इन क्षेत्रों में निवेश और कारोबारी गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
डिजिटल पेमेंट और फिनटेक में बढ़ेंगे अवसर
भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी और डिजिटल पेमेंट सिस्टम नॉर्वे की कंपनियों को आकर्षित कर रहे हैं। इससे उन्हें दुनिया के बड़े और तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिलता है। डिजिटल सेवाओं, फिनटेक और उन्नत प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाएं बढ़ रही हैं। विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए भारत के नीतिगत कदम भी दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बना रहे हैं।
नीतिगत सुधारों से मजबूत होगी साझेदारी
भारत में कारोबार सुगमता, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और निवेश प्रोत्साहन से जुड़ी नीतियां नॉर्वे की कंपनियों के लिए अवसर पैदा कर रही हैं। भारत-ईएफटीए समझौता व्यापार और निवेश को आसान बनाने के साथ नवाचार तथा स्थिरता से जुड़े क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नॉर्वे की तकनीकी क्षमताओं और भारत के बाजार का तालमेल मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, वित्तीय सेवाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग मजबूत कर सकता है। इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और गहरे होने की संभावना है।

