Tuesday, September 8, 2026 |
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SBI Research ने GDP में ‘गायब’ ₹6 लाख करोड़ के दावे को बताया बेबुनियाद, कहा- आंकड़ों की गलत व्याख्या

नई GDP सीरीज में बदलाव को लेकर उठे सवालों पर SBI Research की सफाई, संशोधनों को बताया सामान्य प्रक्रिया

by Business Remedies
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SBI Research report on GDP revision and Indian economy growth analysis

GDP विवाद पर रिपोर्ट: भारतीय अर्थव्यवस्था के GDP आंकड़ों को लेकर उठे विवाद पर SBI Research ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी कर कई सवालों का जवाब दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि Q1 FY26 में कथित रूप से गायब हुए ₹6 लाख करोड़ और Q1 FY23 से Q2 FY26 के बीच ₹42 लाख करोड़ के संशोधन का दावा “बिना तर्क वाली कहानी” है।

नई सीरीज की तुलना पर सवाल: SBI Research ने कहा कि अलग-अलग Base Year Series की तुलना करना सही नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा करना “frivolous” है और इससे आर्थिक आंकड़ों की गलत व्याख्या हो सकती है। SBI के Group Chief Economic Adviser Dr. Soumya Kanti Ghosh ने कहा कि GDP आंकड़ों के बाद चार प्रमुख आर्थिक और राजनीतिक सवाल सामने आए हैं।

GDP संशोधन पर उठे मुद्दे: रिपोर्ट में कहा गया कि Nominal GDP में बड़े संशोधन, अलग-अलग सेक्टरों में बदलाव, GDP Deflator की स्थिति और लंबे समय में GDP Growth तथा Private Investment की गति जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा की जरूरत है।

संशोधन प्रक्रिया सामान्य है: SBI Research ने World Bank के हवाले से कहा कि जब Constant Price Series के लिए नया Reference Year लागू किया जाता है, तो National Accounts में बड़े संशोधन होना सामान्य प्रक्रिया है। भारत में FY05, FY12 और हाल में FY23 Base Year बदलाव के दौरान कुल 239 संशोधन हुए, जिनमें 134 ऊपर और 105 नीचे रहे।

सेक्टर आधारित बदलाव: रिपोर्ट के अनुसार FY23 Base Year Series में बदलाव के बाद GVA संशोधन का बड़ा हिस्सा Trade, Hotels, Transport और Communication सेक्टर में देखा गया। इसमें करीब ₹39 लाख करोड़ का बदलाव आया, जबकि Finance, Insurance, Real Estate और Business Services में ₹13.6 लाख करोड़ का सकारात्मक संशोधन दर्ज किया गया।

बेहतर डेटा से बदली तस्वीर: SBI Research ने कहा कि नई Methodology में ASUSE और PLFS जैसे डेटा स्रोतों के उपयोग से Informal और Unincorporated Sector की गतिविधियों को ज्यादा सटीक तरीके से मापा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पुराने तरीके में Informal Sector के लिए Proxy Indicators का इस्तेमाल किया जाता था।

निष्कर्ष: SBI Research ने कहा कि संशोधनों को किसी राजनीतिक व्यवस्था से जोड़ना उचित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक नए तरीके से आर्थिक गतिविधियों की बेहतर Mapping हुई है और केवल एक Sub-Sector को हटाने पर कुल बदलाव लगभग ₹2.1 लाख करोड़ रह जाता है।



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