अगस्त में 24,23,201 वाहन बिके, सालाना बिक्री 17.51 प्रतिशत बढ़ी
यात्री वाहनों की बिक्री पहली बार चार लाख के पार
दोपहिया और वाणिज्यिक वाहनों ने भी बनाया नया कीर्तिमान
नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
भारतीय वाहन उद्योग ने अगस्त में खुदरा बिक्री का नया इतिहास रच दिया। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस के अनुसार, महीने के दौरान कुल 24,23,201 वाहनों की बिक्री हुई। यह पिछले वर्ष के अगस्त की तुलना में 17.51 प्रतिशत अधिक है। दोपहिया, यात्री, वाणिज्यिक, तीन-पहिया वाहन और निर्माण उपकरण सहित लगभग सभी प्रमुख श्रेणियों में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।
दोपहिया वाहनों की बिक्री सबसे अधिक
अगस्त में 17,14,610 दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष के समान महीने से 19.69 प्रतिशत अधिक है। यह अगस्त में दोपहिया वाहनों की अब तक की सबसे अधिक बिक्री है। बेहतर ग्रामीण मांग और व्यक्तिगत आवागमन की जरूरत ने इस श्रेणी को मजबूती दी।
यात्री वाहन पहली बार चार लाख के पार
यात्री वाहनों की बिक्री 4,02,398 इकाइयों पर पहुंच गई। सालाना आधार पर इसमें 16.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। अगस्त में पहली बार यात्री वाहनों की बिक्री चार लाख के आंकड़े को पार कर गई। हालांकि, जुलाई की तुलना में बिक्री 3.40 प्रतिशत कम रही।
वाणिज्यिक और तीन-पहिया वाहनों का नया कीर्तिमान
वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 14.45 प्रतिशत बढक़र 90,769 इकाइयों पर पहुंच गई। मौसमी माल ढुलाई में सुस्ती के कारण मासिक आधार पर बिक्री 8.93 प्रतिशत घटी। तीन-पहिया वाहनों की बिक्री 8.64 प्रतिशत बढक़र 1,22,281 इकाई रही। इनमें बिजली चालित वाहनों की हिस्सेदारी 65.30 प्रतिशत दर्ज की गई।
निर्माण उपकरणों की बिक्री में सर्वाधिक वृद्धि
पहियों वाले निर्माण उपकरणों की बिक्री में सबसे अधिक 31.45 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ट्रैक्टरों की बिक्री लगभग स्थिर रही और इसमें केवल 0.84 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। जुलाई की रिकॉर्ड बिक्री की तुलना में अगस्त की कुल बिक्री 6.48 प्रतिशत कम रही।
त्योहारी मौसम से बढ़ी उम्मीदें
फाडा अध्यक्ष साई गिरिधर के अनुसार, मानसून के दौरान सामान्य मौसमी सुस्ती और त्योहारों के समय में बदलाव से अगस्त की बिक्री प्रभावित हुई। गणेश चतुर्थी और ओणम की खरीदारी का कुछ हिस्सा सितम्बर में पहुंच गया। करीब 43.59 प्रतिशत विक्रेताओं ने त्योहारी मौसम के लिए अग्रिम खरीदारी शुरू होने की जानकारी दी है। हालांकि, कमजोर मानसून से ग्रामीण मांग प्रभावित होने और 1 सितम्बर से वाहन निर्माताओं द्वारा कीमतें बढ़ाए जाने की चिंता बनी हुई है।

