Wednesday, July 15, 2026 |
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वैश्विक PC Shipment में आई 4.9 प्रतिशत की गिरावट

दूसरी तिमाही में मेमोरी चिप की कमी और भू-राजनीतिक तनाव का असर, दूसरी छमाही में भी बाजार पर दबाव और कीमतें बढ़ने की आशंका

by Business Remedies
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नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क | वैश्विक पर्सनल कंप्यूटर (PC) शिपमेंट में इस वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान वर्ष-दर-वर्ष 4.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। International Data Corporation (IDC) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में PC की कुल शिपमेंट घटकर लगभग 6.82 करोड़ यूनिट रह गई। मेमोरी चिप की कमी, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के कारण लगातार नौ तिमाहियों की बढ़त के बाद पहली बार वैश्विक PC शिपमेंट में गिरावट दर्ज की गई।

मेमोरी चिप की कमी बनी सबसे बड़ी वजह

IDC के अनुसार, दूसरी तिमाही में वैश्विक PC शिपमेंट घटने का सबसे बड़ा कारण मेमोरी चिप की कमी रही। इसके अलावा कई देशों के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन पर पड़े दबाव ने भी उत्पादन और आपूर्ति को प्रभावित किया। इन कारणों से वैश्विक स्तर पर PC की शिपमेंट 4.9 प्रतिशत घटकर लगभग 6.82 करोड़ यूनिट रह गई।

Lenovo पहले स्थान पर, HP और Dell की शिपमेंट में कमी

24.4 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ Lenovo ने पहली रैंक बरकरार रखी, हालांकि उसकी शिपमेंट में 2.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 19.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ HP दूसरे स्थान पर रही, लेकिन उसकी शिपमेंट करीब नौ प्रतिशत घटी। वहीं 13.6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ Dell तीसरे स्थान पर रहा और उसकी शिपमेंट में भी लगभग पांच प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

Apple ने सुस्ती के बीच दर्ज की दोहरे अंकों की बढ़त

वैश्विक बाजार में सुस्ती के बावजूद Apple ने बेहतर प्रदर्शन किया। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 9.9 प्रतिशत रही और उसकी PC शिपमेंट वर्ष-दर-वर्ष 10.1 प्रतिशत बढ़ी। MacBook सीरीज की मजबूत मांग और हाल ही में लॉन्च किए गए MacBook Neo ने कंपनी की वृद्धि को समर्थन दिया। लागत का दबाव होने के बावजूद Apple प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर स्थिति में रही।

दूसरी छमाही में भी दबाव रहने के संकेत

IDC का अनुमान है कि मौजूदा वर्ष की दूसरी छमाही में भी वैश्विक PC शिपमेंट पर दबाव बना रह सकता है। कमजोर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, मेमोरी कंपोनेंट्स की कमी और बढ़ती उत्पादन लागत के चलते बाजार में तेजी लौटने की संभावना फिलहाल कम है। रिपोर्ट के अनुसार, कई कंपनियों ने बढ़ती लागत की भरपाई के लिए उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।



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