नई दिल्ली | BR News Network | पश्चिम एशिया में हाल ही में हुए संघर्ष के दौरान भारत ने Liquefied Petroleum Gas (LPG) के आयात के स्रोतों में विविधता लाई और खाड़ी क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए America, Iran और कई अन्य देशों से खरीद बढ़ा दी। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत की LPG आयात संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला।
परंपरागत रूप से भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत LPG जरूरतें पश्चिम एशियाई देशों से पूरी करता रहा है। जहां मई में Delhi में घरेलू LPG सिलेंडर पर Under-Recovery 651 रुपए प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई। वहीं मार्च से मई के बीच सरकारी तेल कंपनियों को कुल मिलाकर करीब 22,000 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।
America, भारत के लिए प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना
हालांकि अप्रैल, 2026 तक America भारत के लिए एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन गया और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई तक पहुंच गई, जबकि फरवरी में यह केवल 8 प्रतिशत थी। यह बदलाव वर्ष, 2025 के अंत में भारत और America के बीच हुए 22 लाख टन प्रति वर्ष LPG आपूर्ति समझौते से संभव हुआ। यह समझौता भारत की सालाना LPG आयात जरूरतों का लगभग 10 प्रतिशत पूरा करता है।
Iran की भी आयात में छह फीसदी हिस्सेदारी रही
Iran भी भारत के आयात स्रोतों में फिर से शामिल हो गया और अप्रैल में कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत रही। इसके अलावा भारत ने Argentina, Chile, France और Netherlands जैसे देशों से भी LPG की खरीद की। आयात के स्रोतों में विविधता लाने की इस रणनीति से संघर्ष के दौरान आपूर्ति सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिली, लेकिन इसके कारण लंबी दूरी से माल लाना पड़ा और परिवहन लागत भी बढ़ गई।
ऊंची कीमतों और आपूर्ति की चुनौतियों से रही मांग प्रभावित
आपूर्ति में बाधा और बढ़ी हुई कीमतों का असर घरेलू खपत पर भी पड़ा। फरवरी में जहां भारत की LPG खपत 32 लाख टन थी, वहीं अप्रैल में यह घटकर 24.7 लाख टन रह गई। ऊंची कीमतों और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों ने मांग को प्रभावित किया। वित्त वर्ष, 2025-26 में रिकॉर्ड 3.32 करोड़ टन LPG खपत दर्ज की गई थी, जो सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्धि थी। लेकिन इसके बाद के महीनों में मांग में तेज गिरावट देखने को मिली।
वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता रहे ज्यादा प्रभावित
मार्च और अप्रैल में LPG की मांग सालाना आधार पर 13 प्रतिशत घटी, जबकि मई में यह गिरावट और बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता सबसे ज्यादा प्रभावित हुए क्योंकि उन्हें बाजार आधारित कीमतों का सामना करना पड़ा और बढ़ती लागत का असर उन पर तुरंत पड़ा। दूसरी ओर, घरेलू उपभोक्ताओं की मांग अपेक्षाकृत स्थिर रही क्योंकि रसोई गैस की खुदरा कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की गई।
खरीद लागत खुदरा बिक्री मूल्य से अधिक हुई
अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में अपेक्षाकृत कम वृद्धि की गई। Delhi में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत इस अवधि में लगभग 10 प्रतिशत बढ़ी, जबकि 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में 79 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई। घरेलू गैस की कीमतों को सीमित रखने के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMC) की Under-Recovery में भारी वृद्धि हुई, क्योंकि खरीद लागत खुदरा बिक्री मूल्य से काफी अधिक हो गई।

