New Delhi,
भारत के Manufacturing Sector में May महीने के दौरान मजबूती देखने को मिली है। HSBC द्वारा जारी ताजा PMI Data के अनुसार, देश का Manufacturing PMI बढ़कर 55.0 पर पहुंच गया, जो April में 54.7 था। इससे पहले जारी Flash Estimate में यह आंकड़ा 54.3 बताया गया था। नए ऑर्डर, उत्पादन और खरीद गतिविधियों में तेज बढ़ोतरी के चलते यह सुधार दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों ने कच्चे माल और तैयार सामान का भंडारण भी तेज किया है। Middle East में जारी तनाव के कारण कंपनियां एहतियात के तौर पर अतिरिक्त Stock जमा कर रही हैं। इससे Manufacturing गतिविधियों को सहारा मिला है।
HSBC की Chief India Economist प्रांजुल भंडारी ने कहा कि भारत के Manufacturing Sector में लगातार मजबूती बनी हुई है। उत्पादन में तेजी आई है, जबकि खरीद गतिविधियां और तैयार सामान का Stock भी तेज गति से बढ़ा है। हालांकि Export Orders की रफ्तार पहले के मुकाबले थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट में बताया गया कि नए ऑर्डर और उत्पादन में February के बाद सबसे तेज विस्तार दर्ज किया गया है। खासतौर पर Intermediate Goods और Capital Goods Segment में मजबूत वृद्धि देखने को मिली। कंपनियों ने Infrastructure Projects और नए कारोबार को इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बताया है।
घरेलू बाजार की मजबूत मांग ने Manufacturing Growth को गति दी है। वहीं Export Market में भी अच्छी बढ़त दर्ज हुई है। कंपनियों को Asia, Europe, Kenya, Nigeria और Middle East से नए ऑर्डर मिले हैं। दूसरी ओर लागत का दबाव अभी भी बना हुआ है। Middle East युद्ध के कारण ऊर्जा, ईंधन, परिवहन और कच्चे माल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले 45 महीनों में Input Cost Inflation में इससे तेज वृद्धि केवल April 2026 में दर्ज की गई थी।
हालांकि कंपनियां लागत बढ़ने के बावजूद ग्राहकों पर पूरा बोझ नहीं डाल पा रही हैं। Output Price Inflation में नरमी देखी गई है। इससे Manufacturing कंपनियों के Margin पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग और Infrastructure Spending के चलते आने वाले महीनों में भी भारत का Manufacturing Sector मजबूत बना रह सकता है।

