बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। भारत का Food और FMCG Industry तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन इस विकास के समानांतर एक गंभीर और अक्सर अनदेखा किया जाने वाला संकट भी गहराता जा रहा है। यह संकट है खाद्य अपव्यय। यह समस्या केवल उपभोक्ता स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन, भंडारण, वितरण और Retail Supply Chain में फैली हुई है। एक ओर देश में पोषण और खाद्य सुरक्षा चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर प्रत्येक वर्ष लाखों टन ऐसा खाद्य उत्पाद नष्ट हो जाता है जो उपभोग योग्य होता है परन्तु अवधिपार हो जाता है। यह न केवल नैतिक और सामाजिक विफलता है, बल्कि GDP क्षरण, संसाधनों की बर्बादी और पर्यावरणीय नुकसान का भी बड़ा कारण बनता जा रहा है।
Food Start-ups: सबसे अधिक प्रभावित
विशेष रूप से Food Start-ups इस संकट से बुरी तरह जूझ रहे हैं। नवाचार, गुणवत्ता और उत्पाद-डिज़ाइन में सक्षम होने के बावजूद, अधिकांश Start-ups Marketing और Distribution दक्षता की कमी के कारण अपने उत्पादों को समय पर और सही बाजार तक नहीं पहुंचा पाते। परिणामस्वरूप, Start-ups का एक बड़ा हिस्सा अपने उत्पादों को Supply Chain के भीतर ही अवधिपार होते हुए देखता है। यह न केवल पूंजी का नुकसान है, बल्कि नवाचार और उद्यमशीलता के उत्साह को भी तोड़ता है।
अपव्यय की जड़ में छिपी समस्या
Food और FMCG Industry में खाद्य अपव्यय का एक प्रमुख कारण है Backward Traceability का अभाव। Traceability की कमी के चलते सिस्टम समय रहते यह पहचान ही नहीं कर पाता कि कौन-सा उत्पाद जोखिम में है। यदि Batch-Level Tracking और Data-Driven Visibility हो, तो अपव्यय को रोकना, घटाना और पुनःवितरित करना संभव हो सकता है।
B2B Digital Platform : अपव्यय से पुनर्वितरण की ओर
इस समस्या का एक व्यावहारिक और Scalable समाधान है एक Dedicated B2B Digital Platform, जहां व्यापारी, Distributor और Brands अपने उन उत्पादों को सूचीबद्ध कर सकें, जिनकी Expiry Date नजदीक है। इससे एक स्थान पर अटके उत्पाद, दूसरे स्थान पर मांग पूरी करने का साधन बन सकते हैं। यह दृष्टिकोण अपव्यय को व्यवस्थित पुनर्वितरण में बदल देता है।
नुकसान नहीं, समाधान का रास्ता
Near-Expiry Products के लिए Distress Pricing को अक्सर गलत नजर से देखा जाता है, जबकि यह एक व्यावहारिक और जिम्मेदार Business Model है। ऐसे मामलों में विक्रेता उच्च Margin छोड़कर कम कीमत पर उत्पाद बेचकर अपने मूल निवेश की भरपाई कर सकता है। वहीं Buyer को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद किफायती दरों पर मिलता है। यह Model उत्पाद को नष्ट होने से बचाता है, व्यापारियों के नुकसान को सीमित करता है और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देता है।
सरकार की भूमिका : नीति से Platform तक
इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए अब Government की सक्रिय भूमिका अनिवार्य हो जाती है। आवश्यकता है कि सरकार राष्ट्रीय स्तर की Food और FMCG Companies को निर्देशित करे कि वे इस तरह के B2B Platforms के विकास में निवेश करें। इसे Industry-Wide और Democratic बनाएं और इसे केवल व्यावसायिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधन संरक्षण पहल के रूप में देखें। खाद्य अपव्यय सीधे-सीधे GDP क्षरण से जुड़ा हुआ है। यदि उत्पाद नष्ट होते हैं, तो Value Creation भी नष्ट होता है। ऐसे Platforms में निवेश, वास्तव में Economic Protection और Sustainability में निवेश होगा।
खाद्य अपव्यय केवल एक नैतिक या सामाजिक समस्या नहीं है। यह एक संरचनात्मक और Data-Centric चुनौती है। Food Start-ups विशेष रूप से इस संकट से जूझ रहे हैं। यदि Industry और Government मिलकर Backward Traceability और B2B Redistribution Platforms को अपनाएं, तो न केवल अपव्यय घटेगा, बल्कि GDP क्षरण को भी रोका जा सकेगा।
— Manish Jain, Vice President, Kirana King, Jaipur




