Home अर्थव्यवस्था कोरोना वायरस से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए आरबीआई ने की कई घोषणाएं

कोरोना वायरस से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए आरबीआई ने की कई घोषणाएं

by Business Remedies
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नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये देश में लागू 21 दिन की पाबंदियों के आर्थिक व वित्तीय प्रभावों को कम करने के लिये केंद्र सरकार के राहत पैकेज के एक ही दिन बाद रिजर्व बैंक ने भी मौद्रिक नीतियों से आर्थिक गति को सहारा देने की कोशिश की। रिजर्व बैंक ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए तीन अप्रैल को प्रस्तावित मौद्रिक नीति घोषणा से पहले ही रेपो दर, रिवर्स रेपो दर घटाने समेत कई नीतिगत उपाय किये।

रिजर्व बैंक की घोषणा की मुख्य

बातें इस प्रकार हैं:

रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 0.75 प्रतिशत की कटौती की। रेपो दर 5.15 प्रतिशत से घटकर 4.4 प्रतिश्त पर आई।

आरबीआई ने रिवर्स रेपो दर में 0.90 प्रतिश्त की कमी की। यह वह दर है जिसपर बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं।

आरबीआई ने कर्ज देने वाले सभी वित्तीय संस्थानों को सावधिक कर्ज की किस्तों की वसूली पर तीन महीने तक रोक की छूट दी।

रेपो दर में कमी से कोरोना वायरस महामारी के आर्थिक प्रभाव से निपटने में मदद मिलेगी।

बैंकों के लिए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 1 प्रतिश्त की कटौती, सीआरआर 3 प्रतिश्त पर आया।

मौद्रिक नीति समिति के चार सदस्यों ने रेपो दर में कटौती के पक्ष में जबकि दो ने विरोध मे मतदान किया।

मौद्रिक नीति समिति ने अनिशचित आर्थिक माहौल को देखते हुए अगले साल के लिए आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति के बारे में अनुमान नहीं जताया।

कार्यशील पूंजी पर ब्याज भुगतान को टाले जाने को चूक नहीं माना जाएगा, इससे कर्जदार की रेटिंग (क्रेडिट हिस्ट्री) पर असर नहीं पड़ेगा।

देश में बैंक व्यवस्था मजबूत, निजी बैंकों में जमा बिल्कुल सुरक्षित, लोगों को घबराकर पैसा निकालना नहीं चाहिए। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि देश की वृहत आर्थिक बुनियाद 2008 में वित्तीय बाजार संकट के मुकाबले मजबूत।

रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि वित्तीय बाजार की स्थिरता और आर्थिक वृद्धि संभालने के लिये परंपरागत या लीक से हट कर, सभी प्रकार के विकल्प विकल्प खुले हैं।

आरबीआई वित्तीय प्रणाली में 3.74 लाख करोड़ रुपये की नकदी डालेगा:  रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी और उससे जुड़े सार्वजिनक प्रतिबंधाों के आर्थिक और से निपटने के लिये वित्तीय संस्थानों में करीब 3.74 लाख करोड़ रुपये के अतिक्त नकद धन के प्रवाह के इंतजाम किए गए हैं। इससे बैंकों की कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समित ने पूर्व नियोजित बैठक से पहले नीतिगत ब्याज दरों में कटौती और बैंकों के पास कर्ज के लिए अतिरक्त धन उपलब्ध कराने के फैसले किए। दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के निर्णय के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि वित्तीय बाजार दबाव में है और बाजार में स्थिरता तथा आर्थिक वृद्धि को पटरी पर लाने के लिये आरबीआई को कदम उठाने की जरूरत थी।उन्होंने कहा कि नकदी बढ़ाने के उपायों के तहत आरबीआई बाजार में एक लाख करोड़ रुपये की नकदी डालने के लिये रेपो आधारित बांड की नीलामी करेगा।

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