Tuesday, September 27, 2022
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फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल जयपुर में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया

by Business Remedies
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बिजऩेस रेमेडीज/जयपुर
कहा गया है कि नवजात शिशु की केवल तीन जरूरतें होती हैं – माँ की गोद की गर्माहट, उसके स्तनों का दूध और उसकी मौजूदगी के अहसास में सुरक्षा। स्तनपान द्वारा उसकी ये तीनों जरूरतें पूरी हो जाती हैं। विश्व स्तनपान सप्ताह (1 अगस्त से 7 अगस्त) मनाने के लिए इस पूरे सप्ताह जयपुर के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल में कई गतिविधियों का आयोजन किया गया।
अग्रणी विशेषज्ञ, डॉ. जे पी दाधीच, सीनियर कंसल्टैंट, नियोनैटोलॉजी; डॉ. सत्येन के हेमराजानी, सीनियर कंसल्टैंट, नियोनैटोलॉजी; डॉ. संजय चौधरी, सीनियर कंसल्टैंट, पीडियाट्रिक एवं नियोनैटोलॉजी और डॉ. श्याम सुंदर शर्मा, कंसल्टैंट, नियोनैटोलॉजी ने इस सप्ताह विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया।
गायनेकोलॉजी ओपीडी में अभिभावकों से मनोरंजक क्रॉसवर्ड और पजल्स पूछे गए, जिससे प्रसवपूर्ण स्तनपान की शिक्षा बढ़ाने में मदद मिली। नवजात शिशुओं का ख्याल रखने वाले स्टाफ से नर्सिंग क्विज़, पीडियाट्रिक एवं गायनेकोलॉजी डॉक्टर्स से डॉक्टर्स क्विज पूछे गए और नर्सिगकर्मियो के लिए पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सप्ताह के समापन कार्यक्रम में विभिन्न विजेताओं को पुरस्कृत किया गया!
विभिन्न कार्यक्रमों में चिकित्सकों ने स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए विभिन्न सुझाव दिये : डॉ. जे पी दाधीच, सीनियर कंसल्टैंट, नियोनैटोलॉजी ने बताया कि शिशु के जन्म से पहले अपने डॉक्टर से स्तनपान के बारे में ज़रूरी जानकारी लें । उन्होंने कहा की शिशु के जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराना शुरू कर दें। शिशु को लंबे समय तक अपने शरीर से चिपकाकर रखें, ताकि दोनों की त्वचा संपर्क में हो। पर्याप्त मात्रा में लिक्विड आहार लें। अपने और अपने शिशु के बेहतर पोषण के लिए अतिरिक्त आहार और कैलोरी लें। अपने शिशु की मालिश और अन्य शारीरिक सार सम्भाल की गतिविधियाँ करें जिससेे शिशु के साथ आपका संबंध मजबूत हो।
डॉ. सत्येन के हेमराजानी, सीनियर कंसल्टैंट, नियोनैटोलॉजी ने कार्यक्रम में बताया की यदि आप काम पर जाती हैं, तो ऑफिस जाने से पहले शिशु के लिए अपने स्तनों से दूध निकालकर उसे रेफ्रिजरेटर में रखें। इस दूध को 24 घंटों तक शिशु को पिलाया जा सकता है। हर बार दूध पिलाने के लिए अलग स्तन का इस्तेमाल करें। पहले एक स्तन का दूध पूरा खाली करें, उसके बाद ही दूसरे स्तन से दूध पिलाएं।
डॉ. संजय चौधरी, सीनियर कंसल्टैंट, पीडियाट्रिक एवं नियोनैटोलॉजी ने कहा की अपने शिशु की भूख के संकेतों को समझने के लिए अपने पीडियाट्रिशियन से परामर्श करें और उसी के अनुरूप शिशु को दूध पिलाएं।
डॉ. श्याम सुंदर शर्मा, कंसल्टैंट, नियोनैटोलॉजी ने बताया की शिशु के आहार की समस्याओं और उनके समाधान के लिए दूध पिलाने वाली अन्य माताओं, स्तनपान काउंसलर, अपने ऑब्सटीट्रिशियन और अपने पीडियाट्रिशियन से बात करें। शिशु को दूध पिलाने के दौरान शांत व प्यार व सकारात्मक ऊर्जा से भरे रहें, इससे आपका शिशु सेहतमंद और बुद्धिमान बनेगा। स्तनपान कराना माँ के द्वारा शिशु के लिए किया जाने वाला सर्वश्रेष्ठ कार्य है।

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