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गेहूं का दाम न बढ़े इस पर सरकार ने उठाए कदम

by Business Remedies
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punit jain

महंगाई ने हर तरफ से आमजन को झकझोर दिया है, सरकार ने इस पर अंकुश लगाने के लिए कुछ पहल भी की है। सरकार ने गेहूं के दाम बढऩे से रोकने और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए स्टॉक होल्डिंग लिमिट लगा दी है। सरकार की कोशिश गेहूं की जमाखोरी रोकने की भी है। अब एकल खुदरा विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं, प्रसंस्करणकर्ताओं और थोक व्यापारियों को हर शुक्रवार को अपने गेहूं स्टॉक की घोषणा करनी होगी। जहां एक ओर देश में गेहूं की कमी की अफवाह भी फैल रही है, इसे दूर करने के लिए सरकार पुरजोर से लग रही है। अभी तक गेहूं के निर्यात पर कोई रोक नहीं है और चीनी के निर्यात पर लगे प्रतिबंध की समीक्षा का भी कोई प्रस्ताव नहीं है। पर सरकार चाहती है कि गेहूं की कीमतें स्थिर रहें। जहां थोक व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा 3,000 टन होगी, जबकि प्रसंस्करणकर्ताओं के लिए यह उनकी प्रसंस्करण क्षमता का 70 प्रतिशत होगा। वहीं बड़ी श्रृंखला वाले खुदरा विक्रेताओं के लिए यह प्रति दुकान 10 टन और कुल सीमा 3,000 टन होगी। वहीं एकल खुदरा विक्रेताओं के लिए यह 10 टन होगा। जहां एक तरफ गेहूं सहित आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की बात कही जा रही है। स्टॉक सीमा को जमाखोरी कम करने के लिए ऐसा किया गया है। यह भी कहा कि खुदरा कीमतों पर नजर रखने के लिए कई उपकरण हैं और स्टॉक सीमा उन्हीं में से एक उपकरण है।पिछले वर्ष 1 अप्रैल, 2023 को गेहूं का प्रारंभिक स्टॉक 82 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) था, जबकि 1 अप्रैल, 2024 को यह 75 एलएमटी था। पिछले वर्ष 266 एलएमटी की खरीद की गई थी, जबकि इस वर्ष सरकार ने 262 एलएमटी की खरीद की है और खरीद अभी भी जारी है। इसलिए गेहूं की कमी सिर्फ 3 लाख मीट्रिक टन है।

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