Tuesday, September 27, 2022
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बतंगड़

by Business Remedies
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‘बाजे छे नौबत बाजा ओ म्हारा डिग्गीपुरी का राजा……’ प्रतिवर्ष सावन शुक्ल छठ को जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर से डिग्गी कल्याणजी तक जाने वाली पदयात्रा जन आस्था का पर्याय बन चुकी है। यात्रा के संयोजक व संचालक श्रीजी शर्मा के दादा रामेश्वर लोहे वाले ने वर्ष 1964 में सावन शुक्ल छठ को मात्र पंद्रह लोगों के साथ डिग्गी कल्याणजी की यात्रा शुरू की। अब इस यात्रा का नजारा ही बदल गया है। लाखों भक्तों का रैला, जगह-जगह स्वागत, भंडारे ओर खान-पान की मनुहार, न जाने कौन-कौन से गावों से पदयात्री आते हैं और कौन लोग व्यवस्था करते हैं, कुछ पता नहीं। बस पग-पग पर मनुहार। इस पदयात्रा में हर उम्र के स्त्री-पुरुष, न जाति का भेद और न ही गांव की पहचान। बस एक ही लक्ष्य, डिग्गी की पदयात्रा और कल्याण धणी के दर्शन।

डिग्गी यात्रा शुरू करने वाले रामेश्वर लोहेवाले को विवाह के बाद 14 वर्ष तक कोई संतान नहीं हुई, तो उन्होंने अपनी बहन के बेटे प्रहलाद को गोद ले लिया। लेकिन प्रहलाद के भी विवाह के सात साल बाद तक कोई संतान नहीं हुई, तो रामेश्वरलाल दु:खी रहने लगे। इसी दौरान कोई संत उनकी दुकान पर आए और उनकी चिंता सुनकर डिग्गी कल्याणजी की पैदल यात्रा करने की बात कही। इस पर रामेश्वरलाल ने वर्ष 1964 में सावन शुक्ल छठ को जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित ताड़केश्वर मंदिर से पंद्रह लोगों के साथ यात्रा शुरू की। परिक्रमा प्रतिवर्ष सावन शुक्ल छठ को होने लगी। परिक्रमा शुरू होने के आठ साल बाद प्रहलाद के संतान हुई, जिसका नाम श्रीजी रखा गया। तभी से यह परिक्रमा निर्बाध रूप से चल रही है। केवल कोविड काल को छोड़कर कभी कोई रूकावट नहीं आई।

डिग्गी कल्याणजी की यह पदयात्रा 5 दिन में 72 किलोमीटर का रास्ता पूरा कर ग्यारस को कल्याणजी के दर्शन के साथ पूर्ण होती है। यात्रा का प्रथम पड़ाव मदरामपुरा में होता है। हरसूलिया, फागी, चोसला होते हुए पांच दिन में यात्री डिग्गी पहुंचते हैं। इस दौरान जगह-जगह सत्संग, भंडारे, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहते हैं। डिग्गी कल्याणजी मंदिर राजस्थान के प्रमुख मंदिरों में से एक है। सवंत 1584 यानी वर्ष 1527 में मेवाड़ के महाराणा संग्राम सिंह के शासन में इसका पुनर्निर्माण हुआ। मंदिर के बारे में कई रोचक कथाएं भी प्रचलित हैं। यहां भुने हुए चने प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं।

उमेन्द्र दाधीच

@ बिजऩेस रेमेडीज

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