Home विशेष लेख कोरोना महामारी में बच्चों की पढ़ाई में कैसे बनी रहे निरंतरता?

कोरोना महामारी में बच्चों की पढ़ाई में कैसे बनी रहे निरंतरता?

by Business Remedies
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देश में कोरोना महामारी ने मार्च के बाद दूसरी लहर के संकेत दिए हैं। लगातार बढ़ रहे संक्रमितों की संख्या ने हर किसी को चिंता में डाल दिया है। कुछ राज्यों ने तो लॉकडाउन लगा दिया है। ऐसे में फिर से ना सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को बल्कि अर्थव्यवस्था को झकझौर दिया है। वहीं इसे देखते हुए शिक्षा क्षेत्र में भी परिवर्तन किए गए हैं। अब बच्चों की पढ़ाई ऑफलाइन न होकर ऑनलाइन (डिजिटल माध्यम) से करवाई जा रही है। ऐसे में इस शिक्षा प्रणाली का क्या भविष्य है? इसी को लेकर बिजनेस रेमेडीज समाचार पत्र के जरिए शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणीय रहे स्कूलों, कॉलेजों व विश्वविद्यालय
के संचालकों से बातचीत की गई।
प्रश्न: कोरोना महामारी की दूसरी लहर के संकेत मिलने से शिक्षा के क्षेत्र में क्या परिवर्तन आया है?
प्रो. डॉ.बिस्वजोय चटर्जी: अभी फिलहाल एजुकेशन सिस्टम पूरा ही ऑनलाइन में परिवर्तित हो गया है। वर्तमान स्थिति में ऑनलाइन शिक्षा एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई है, जबकि हम यह भी जानते है की यह सबसे अच्छा विकल्प नहीं है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह सबसे अच्छा विकल्प है। आज की बात नहीं है बहुत पहले से ही यह व्यवस्था शुरू हो गई थी। करीब पांच साल पहले से कुछ कुछ ऑफ लाइन और कुछ कुछ ऑनलाइन व्यवस्था थी। हमने भी पांच वर्ष पहले से इस व्यवस्था को अपनाना शुरू कर दिया था। आज की परिस्थिति में छात्रों के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे सीखने के इस तरीके को पसंद करने के लिए अपने दिमाग को मजबूत करना शुरू करें अन्यथा एक छात्र का कॅरियर नुकसान में होगा। हमने काफी समय से ब्लेंडेड लर्निंग की विद्यार्थियों के लिए शिक्षा शुरू की है।
प्रश्न: एजुकेशन 4.0 , ऑनलाइन लर्निंग व ब्लेंडेड लर्निंग से आपका क्या तात्पर्य है?
प्रो. डॉ.बिस्वजोय चटर्जी: ब्लेंडेड लर्निंग से अर्थ है कि ऑनलाइन शिक्षा 4.0 की सुविधा। आज जहां उद्योग क्रांति (आईआर) 4.0 का अनुसरण किया जा रहा है। उद्योग ने 3.0 से 4.0 तक क्रांति ला दी है, (जहां उद्योग में सब कुछ स्वचालित हो रहा है, जिसमें इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लूलट वर्चुअल और ऑगमेंटेड रियलिटी शामिल है) शिक्षा 4.0 में स्थानांतरित होना शिक्षा के लिए अनिवार्य और अपरिहार्य दोनों है। लेकिन शिक्षा 4.0 को कैसे परिभाषित किया गया है, उसमें 9 चीजों का मिश्रण है। उनमें कहीं भी/ कभी भी सीखना, व्यक्तिगत सीख/शिक्षा, लचीली डिलीवरी, साथी और गुरु, क्यों/कहां और नहीं क्या/कैसे व्यावहारिक अनुप्रयोग, मॉड्यूलर और परियोजना आधारित शिक्षा, छात्र स्वामित्व मूल्यांकन नहीं जांचा गया आदि यह सब बातें इसमें आती हैं।
प्रश्न: क्या यह व्यवस्था आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है?
प्रो. डॉ.बिस्वजोय चटर्जी:ऑनलाइन शिक्षा ने शिक्षा 4.0 को सुगम बनाया है। हमें इनमें से प्रत्येक बिंदु को अलग-अलग ढंग से देखते हैं। प्रथम कहीं भी/ कभी भी सीखने का मतलब यह होगा कि छात्र अपनी इच्छा से कहीं भी कभी भी सीखने में सक्षम होना चाहिए। निश्चित रूप से ऑनलाइन सीखने से यह सुविधा होगी,क्योंकि एक छात्र के पास पूरे इंटरनेट पर असंख्य संसाधनों तक पहुंच है और वह इंटरनेट से सीख सकता है, चाहे वह स्थान और समय कुछ भी हो। दूसरी व्यक्तिगत शिक्षा या खुद से सीखना भी बहस योग्य रूप से ऑनलाइन सीखने के माध्यम से बेहतर होगा, क्योंकि वहां गुंजाइश बेहतर है। लचीली डिलीवरी जहां तक संसाधनों शिक्षण के लचीले वितरण के तीसरे बिंदु का संबंध है, ऑनलाइन/ ऑफलाइन सीखने में कोई भी बेहतर स्कोर नहीं करना चाहिए। यह संबंधित शिक्षक पर अधिक निर्भर करता है कि वह किस तरह से अधिक सहज है। पर आधुनिक समय के शिक्षकों को शिक्षा को 4.0 तक क्रांतिकारी बनाने के लिए और अधिक लचीलेपन के साथ वितरित करने का एक बेहतर तरीका खोजने की जरूरत है। साथी और गुरु सीखने में साथियों और संरक्षकों का प्रभाव ऑफलाइन सीखने में बेहतर माना जाता है और यहां कैंटीन, खेल के मैदान,भौतिक प्रयोगशालाओं, कक्षा में वाद-विवाद आदि की भूमिका आती है। पर शिक्षा 4.0 में जाने के लिए सभी संस्थानों को आपस में मिलने का बेहतर अवसर देने की आवश्यकता है।
प्रश्न:क्या ऑनलाइन माध्यम बच्चों को परीक्षा में सफलता दिला सकता है?
प्रो. डॉ.बिस्वजोय चटर्जी: हां, यह जरूर है कि ऑनलाइन पूरी तरह से बेस्ट ऑप्सन नहीं है। 65 फीसदी बेस्ट है, पर यह जरूर है कि प्रोफेशनलिज्म में ऑनलाइन शिक्षा बेहतर ऑप्शन है,क्योंकि इसमें हम सॉफ्टवेयर के जरिये प्रश्न पत्र अपलोड कर उन्हें भेजकर उन्हें हल करने के लिए भेजते हैं,जिसे अनिवार्यता से उन्हें पूरा करना पड़ता है। ऑनलाइन शिक्षा के जरिये हम पूरी पारदर्शिता बरत रहे हैं, कौन विद्यार्थी क्या कर रहा है, यह सब देखते हैं।
प्रश्न:ऑनलाइन शिक्षा कब शुरू की और कैसे उपयोगी है?
प्रो. डॉ.बिस्वजोय चटर्जी: यूईएम विश्वविद्यालय कोरोना महामारी से पहले भी सीखने के मिश्रित तरीके का पालन कर रहा था यानी जहां कुछ बातचीत, व्याख्यान, विशेष कक्षाएं और संयुक्त कक्षाएं नियमित ऑफलाइन कक्षाओं के साथ-साथ ऑनलाइन भी होती थी। जब मार्च, 2020 में लॉकडाउन घोषित किया गया था, तब से ही तुरंत एक दिन में ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित हो गया था। सभी कक्षाएं 14 मार्च, 2020 से ऑनलाइन मोड में संचालित होने लगीं थी। यूईएम जयपुर में माइक्रोसॉफ्ट टीम्स, गूगल मीट और गो-वेबिनार जैसे सॉफ्टवेयर का उपयोग करके कक्षाएं संचालित की जाती हैं। हमने इन सभी प्लेटफॉम्र्स की मय भुगतान सदस्यता ली हुई है, साथ ही यहां सभी को संबोधित करना, कम्प्यूटर स्क्रीन साझा करना-प्रस्तुतिकरण, एक वर्चुअल व्हाइटबोर्ड यदि आवश्यक हो तो उस पर लेखन सुविधाओं के साथ साझा करना संभव है। वीएलएबी, हैकर रैंक आदि का उपयोग करके प्रयोगशालाएं भी आयोजित की जाती हैं। वीएलएबी एक भारत सरकार की पहल है, जहां आप वस्तुत: आवश्यक विभिन्न उपकरणों/उपकरणों का चयन कर सकते हैं और स्क्रीन पर प्रयोग दिखा सकते हैं। कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए हैकर रैंक जरूरी है। हमारे असाइनमेंट गूगल कक्षा के माध्यम से साझा किए जाते हैं और छात्र वहां असाइनमेंट जमा करते हैं और शिक्षक इसकी जांच करते हैं और उसी प्लेटफॉर्म का उपयोग करके वापस लौटते हैं। वर्चुअल मार्किंग जैसे गलत उत्तरों/कथनों को खंगालने और सही लिखने के लिए पेन का उपयोग करना संभव है। हमारी परीक्षा आईईएमजेईई नामक हमारे अपने मंच का उपयोग करके आयोजित की जाती है,जहां छात्र प्रश्न पत्र प्राप्त कर सकते हैं। कागज पर लंबे उत्तर लिख सकते हैं, स्कैन कर सकते हैं और शिक्षक द्वारा जांच के लिए वहां जमा कर वापस लौट सकते हैं।
प्रश्न: इन हालतों में जहां कई निजी स्कूल,कॉलेज बंद होने के कगार पर है, ऐसे में सरकार को उनकी क्या मदद करनी चाहिए?
प्रो. डॉ.बिस्वजोय चटर्जी: जो कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रॉपर तरीके से विद्यार्थियों को पढ़ा पा रहे हैं,उन्हें सरकार को मदद करनी चाहिए। इसके अलावा एक कॉमन ऑनलाइन सिस्टम विकसित कर माइक्रोसॉफ्ट टीम के जरिये पढ़ाया जाए, इसमें विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी काफी सहूलियत मिलेगी।
प्रश्न: निजी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को इन हालातों में आगे की क्या प्लानिंग करनी चाहिए?
प्रो. डॉ.बिस्वजोय चटर्जी: एक कॉमन ऑनलाइन सिस्टम को डवलप कर उसे व्यवहारिक बनाया जाए ताकि हर कोई उसे परिस्थितियों के अनुकूल इसे अपना सकें। सरकार ने भी पिछले दिनों इस ओर आगे कदम बढ़ाया है,संभवत: इसे आने वाले समय में सभी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में क्रियान्वित भी किया जाए।
प्रश्न: कोरोना महामारी की स्थिति में कब तक सुधार की उम्मीद रखते हैं?
प्रो. डॉ.बिस्वजोय चटर्जी:सम्भवत: जुलाई के आखिर तक कोरोना महामारी में सुधार आ जाए। उसके बाद अगस्त से ऑफलाइन कक्षाएं भी शुरू हो जाएं।
प्रश्न: कोरोना महामारी में क्या
आपने जरूरतमंदों या गरीब विद्यार्थियों की फीस में कोई कटौती की है?
प्रो. डॉ.बिस्वजोय चटर्जी: यूईएम जयपुर विश्वविद्यालय के उन छात्रों की शिक्षा का खर्च वहन करेगा,जिन्होंने कोरोना महामारी के कारण अपने पिता या परिवार के कमाने वाले सदस्य को खो दिया है और वित्तीय समस्या में है। यूईएम जयपुर विश्वविद्यालय उन 10 छात्रों को भी एक सेमेस्टर की छात्रवृत्ति प्रदान करेगा, जिनके पिता या परिवार के कमाने वाले सदस्य ने महामारी के कारण अपनी नौकरी खो दी है। इसके अलावा यूईएम जयपुर विश्वविद्यालय के उन 10 पूर्व छात्रों को एक लाख रुपए तक प्रदान करेगा, जिन्होंने महामारी के दौरान अपनी नौकरी गंवा दी है और वित्तीय संकट में है।
प्रश्न:आपके विश्वविद्यालय मेें कौन-कौन से कोर्सेज चल रहे हैं?
प्रो. डॉ.बिस्वजोय चटर्जी: यूईएम विश्वविद्यालय जयपुर मेें इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट और फिजियोथैरपी के कोर्सेज हैं। इनमें अण्डर ग्रेजुएट डिग्री कोर्स बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी बी.टेक, पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी एम.टेक, अण्डर ग्रेजुएट डिग्री कोर्स बैचलर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन,अण्डर ग्रेजुएट डिग्री कोर्स बैचलर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन बीबीए और एमबीए, पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन एमबीए, पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स एग्जीक्यूटिव एमबीए फॉर वकिंग प्रोफेशल्स,अण्डर ग्रेजुएट डिग्री कोर्स बैचलर ऑफ फिजियोथैरपी, पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स मास्टर इन फिजियोथैरपी और डॉक्टर ऑफ फिलोसॉपी प्रमुख है।
प्रश्न: आप अपने यहां कब से क्लासेस शुरू करवा रहे हैं?
प्रो. डॉ.बिस्वजोय चटर्जी: क्लासेस तो नियमित ऑनलाइन चल ही रही है। जहां तक एग्जाम करवाना का है,उसका ऑनलाइन असेसमेंट करवा रहे हैं। इसके अलावा सरकार की गाइड लाइन का भी इंतजार कर रहे हैं,उसके आधार पर हम एग्जाम करवाएंगे।

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