मथुरा-वृंदावन आध्यात्मिक स्थल होने के साथ-साथ देशी विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करता है। यहाँ के प्राचीन मंदिर, उनसे जुड़ी गौरव गाथाएँ और यहाँ की संस्कृति देश की अमूल्य धरोहर हैं। यहाँ के प्रमुख मंदिर हैं – गोविन्द देव मंदिर, रंगजी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, बांकेबिहारी मंदिर और इस्कॉन मंदिर। मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रमुख स्थान हैं गोकुल, बरसाना और गोवर्धन। गोकुल में श्रीकृष्ण का पालन उनके मामा कंस की नजर से दूर चोरी छिपे किया गया था। श्रीकृष्ण की सहचरी राधा बरसाना में रहती थीं, जहां आज भी होली के अवसर पर ल_मार होली धूम धाम से खेली जाती है। गोवर्धन में श्रीकृष्ण ने स्थानीय निवासियों को वर्षा के देवता इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊँगली पर उठा लिया था। मथुरा भगवान श्रीकृष्ण का निवास स्थान है और यहाँ का इतिहास अत्यंत पुराना है।
मथुरा के अन्य दर्शनीय स्थल : बरसाना, गोकुल नंदगांव (नंदग्राम), विश्राम घाट, कृष्ण जन्मस्थान मंदिर, कंस का किला, द्वारिकाधीश मंदिर, मथुरा का सरकारी म्यूजियम।
वृंदावन के अन्य दर्शनीय स्थल : वृंदावन, मदन मोहन मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, श्री राधा रमण मंदिर, रंगाजी मंदिर, गोविंद देव मंदिर, इस्कॉन मंदिर, वृंदावन के मंदिर।
कैसे पहुंचें: मथुरा उत्तर प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों मसलन दिल्ली, आगरा, मुंबई, जयपुर, ग्वालियर, हैदराबाद, चेन्नै, लखनऊ से रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है।
प्रमुख रेलवे स्टेशन: मथुरा जंक्शन (उत्तर-मध्य रेलवे) और मथुरा कैंट (उत्तर-पूर्व रेलवे)।
सडक़ मार्ग से : मथुरा नेशनल हाईवे के जरिये सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
मथुरा में खान पान व अन्य सुविधाएं : समोसा कचोरी, पूरी-आलू, जलेबी, खामन, ढोकला, पोहे, टमाटर चाट, दूध से बने पकवान, लस्सी, पेड़ा, खोया मिठाई, सोएं पापड़ी, घेवर।
वृन्दावन : पेड़ा, लस्सी और चाट।
कुछ अन्य विशेष बातें : मथुरा गायों की भूमि है अत: यहां दूध से बनी मिठाइयां लोकप्रिय हैं। मथुरा के पेड़े सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं। मथुरा की पूड़ी-कचोरी भी कम लोकप्रिय नहीं। इसके अलावा अन्य नमकीन व्यंजनों के लिए भी यह प्रसिद्ध है। हस्तशिल्प के सामान खासकर भगवान कृष्ण से जुड़े आभूषण भी यहां अधिसंख्य दुकानों में मिलते हैं।
मेले और पर्व : मथुरा-वृंदावन की होली विश्व भर में प्रसिद्ध है। इसके अलावा भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी भी बहुत धूम-धाम और हर्ष-उल्लास के साथ पूरे ब्रज में मनाया जाता है।
