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चीनी की मिठास लेने के लिए अब ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं!

by Business Remedies
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punit jain

एक तरफ जहां सब्जियों, फलों के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वहीं दूसरी ओर अब आने वाले समय में चीनी की मिठास लेने के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं,क्योंकि राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ ने सरकार से चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य बढ़ाकर कम से कम 42 रुपए प्रति किलोग्राम करने का आग्रह किया है ताकि बढ़ती उत्पादन लागत के बीच मिलों को परिचालन जारी रखने में मदद मिल सके। वहीं सरकार भी 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2024-25 के आगामी सीजन के लिए चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य को बढ़ाने पर विचार कर रही है। अगर सरकार उनकी मांग मान लेती है तो चीनी की एमएसपी में बढ़ोतरी करती है तो इसका असर खुदरा मार्केट में देखने को मिलेगा। चीनी की प्रति किलो कीमत बढ़ सकती है यानी चीनी खरीदने के लिए अधिक पैसे चुकाने होंगे। व्यापारियों का मानना है कि चीनी की कीमत प्रति किलो 3 से 4 रुपए बढ़ सकते है। जहां न्यूनतम बिक्री मूल्य वर्ष, 2019 से 31 रुपए प्रति किलोग्राम पर अपरिवर्तित रखा गया है, जबकि सरकार ने हर साल गन्ना उत्पादकों को दिए जाने वाले उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में वृद्धि की है। एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने बयान में कहा भी है कि महासंघ ने खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों को आंकड़े सौंपे हैं, जिसमें चीनी उत्पादन लागत में लगातार वृद्धि दिखाई दे रही है, जिससे न्यूनतम विक्रय मूल्य को गन्ने के एफआरपी के साथ तालमेल बिठाना आवश्यक हो गया है। उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि यह कदम सरकार के 100-दिवसीय एजेंडे का हिस्सा होगा। एनएफसीएसएफ और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संयुक्त रूप से अक्टूबर-2024 से शुरू होने वाले आगामी सत्र से सहकारी मिलों को उनकी पेराई क्षमता के आधार पर गन्ना कटाई मशीनें उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रहे हैं।

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