वॉशिंगटन/एजेंसी। अमेरिका ने कहा है कि चीनी और रूसी कंपनियों एवं व्यक्तियों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों का मकसद सरकार पर प्रतिबंध लगाना नहीं है। साथ ही अमेरिका ने यह उम्मीद भी जताई है कि चीन और रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा उत्तर कोरिया पर लगाए गए प्रतिबंधों को अमल में लाएंगे। ट्रंप प्रशासन ने उन चीनी और रूसी कंपनियों एवं व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगा दिया जो उत्तर कोरिया को उसके मिसाइल और परमाणु हथियार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे थे। इस प्रतिबंध में दस रूसी और चीनी कंपनियों के अलावा छह व्यक्तियों को निशाना बनाया गया है जो इस अलग-थलग रहने वाले देश के साथ व्यापार में लिप्त थे।
अमेरिकी वित्त विभाग ने चीनी और रूसी लोगों तथा कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए और उन पर उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम में मदद देने और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचकर निकलने के प्रयास करने के आरोप लगाए गए। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग पर दबाव बनाया था कि वह अपने सहयोगी उत्तर कोरिया को अपनी परमाणु आकांक्षाओं और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम छोडऩे के लिए मनाने के लिए और प्रयास करे।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता चुनयिंग ने कहा कि अमेरिकी का यह कदम समस्या का समाधान खोजने में मददगार नहीं होगा, यह साझा भरोसे और सहयोग के लिए भी अच्छा नहीं है। हम अमेरिकी पक्ष से आग्रह करते हैं कि वह इस गलत कदम पर रोक लगाए और इसे सुधारे।

