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  • बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। देश के सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में जनवरी माह के दौरान नरमी रही जिससे क्षेत्र की वृद्धि दर कम…

  • बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली(हि.स.)। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने ई-नीलामी बिक्री योजना के तहत घरेलू बाजार में 22 राज्यो को 8 लाख मीट्रिक…

  • बजट-2023-24 वित्त मंत्री ने मोदी सरकार 2.0 का आखिरी पूर्ण बजट पेश किया। इस बार का बजट काफी खास रहा, क्योंकि देश…

  • बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन करने को तैयार है और…

  • बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। पेट्रोलियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक सामान, रसायन और एल्युमीनियम सामान की वजह से चालू वित्त वर्ष के पहले नौ माह (अप्रैल-दिसम्बर)…

  • बिजनेस रेमडीज/हैदराबाद,(हि.स)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वैश्विक स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सलाहकारों, निवेशकों और…

  • बिजनेस रेमेडीज/मुंबई। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 20 जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान 1.727 अरब डॉलर बढक़र 573.727 अरब डॉलर हो…

  • बिजनेस रेमेडीज/जयपुर नकली उत्पाद भारत के सभी महत्वपूर्ण उद्योगों जैसे फार्मास्युटिकल्स, एफएमसीजी, ऑटोमोटिव्स, परिधान, कन्ज़्यूमर ड्यूरेबल्स/ इलेक्ट्रोनिक्स, कृषि उत्पादों-के स्थायी विकास को…

  • बिजनेस रेमेडीज/जयपुर नकली उत्पाद भारत के सभी महत्वपूर्ण उद्योगों जैसे फार्मास्युटिकल्स, एफएमसीजी, ऑटोमोटिव्स, परिधान, कन्ज़्यूमर ड्यूरेबल्स/ इलेक्ट्रोनिक्स, कृषि उत्पादों-के स्थायी विकास को प्रभावित कर रहे हैं, ASPA और CRISIL द्वारा जारी नई रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है। यह रिपोर्ट भारत के 12 शहरों (दिल्ली, आगरा, जलंधर, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, इंदौर, कोलकाता, पटना, चेन्नई, बैंगलोर और हैदराबाद) में उपभोक्ताओं एवं खुदरा विक्रेताओं के साथ किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है, जिसके द्वारा विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में नकली उत्पादों के बारे में जानने का प्रयास किया गया है।  सर्वेक्षण का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि उपभोक्ताओं की धारणा के मुताबिक बाज़ार में नकली उत्पादों की सीमा 25-30 फीसदी है, जो उद्योग जगत के अनुमानों की तुलना में अधिक है। सबसे ज़्यादा जालसाज़ी गतिविधियां एफएमसीजी, परिधान एवं कृषि रसायन क्षेत्रों में सामने आई हैं (तकरीबन 30 फीसदी), इसके बाद फार्मास्युटिकल, ऑटोमोटिव एवं कन्ज़्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी नकली उत्पादों के बहुत अधिक मामले (20-25 फीसदी) पाए गए हैं। सर्वेक्षण के अनुसार तकरीबन 80 फीसदी उपभोक्ताओं ने इस बात को स्वीकारा कि बाज़ार में नकली उत्पाद मौजूद हैं और कई कारणों के चलते मजबूरी में ऐसे नकली उत्पाद खरीदते हैं जैसे कीमत के प्रति संवेदनशीलता, मांग और आपूर्ति के बीच अंतर, लक्ज़री ब्राण्ड खरीदने की चाहत, साथियों का दबाव एवं सामाजिक प्रेरणा। 27 फीसदी उपभोक्ता खरीद के समय इस बात से अनजान थे कि उनके द्वारा खरीदे गए उत्पाद नकली थे। ऐसे में इस मुद्दे और नकली उत्पादों को पहचानने के तरीकों के बारे में जागरुकता बढ़ाना और भी ज़रूरी हो जाता है। परिधान (31 फीसदी), एफएमसीजी (28 फीसदी), ऑटोमोटिव (25 फीसदी) शीर्ष पायदान के उद्योग हैं जहां उपभोक्ताओं को सबसे ज़्यादा नकली उत्पादों का सामना करना पड़ा। इसके बाद फार्मास्युटिकल्स (20 फीसदी), कन्ज़्यूमर ड्यूरेबल्स (17 फीसदी) और कृषि रसायन (16 फीसदी) में भी बड़ी मात्रा में नकली उत्पाद पाए गए। यह जानने के बावजूद भी कि उन्हें बेचे गए उत्पाद नकली हैं, अक्सर उपभोक्ता इसके बारे में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। रिपोर्ट के बारे में बात करते हुए श्री नकुल पसरीचा, अध्यक्ष, ऑथेन्टिकेशन  सोल्युशन प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (ASPA) ने कहा, ‘‘भारत में वित्तीय वर्ष में नकली माल का कारोबार रु 2.6 ट्रिलियन का हुआ, और इसने लगभग सभी उद्योगों को प्रभावित किया। देश के सभी उद्योगों में यह कारोबार तेज़ी से बढ़ रहा है और उपभोक्ताओं को प्रभावित कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में उपभोक्ताओं को जागरुक करने के लिए काफी प्रयास किए गए हैं, हालांकि हमें उपभोक्ताओं को इस विषय पर और जागरुक बनाना होगा। उपभोक्ता नकली उत्पादों से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बड़ी संख्या में उपभोक्ता जालसाज़ी के असली खतरे से अनजान हैं, इसके चलते देश भी नकली उत्पादों पर अंकुश लगाने में उपभोक्ताओं की क्षमता का उचित उपयोग नहीं कर पा रहा है।’ सुरेश कृष्णमूर्ति, सीनियर डायरेक्टर, CRISIL मार्केट इंटेलीजेन्स एण्ड एनालिटिक्स ने कहा, ‘‘जालसाज़ी सिर्फ उच्च स्तरीय लक्ज़री उत्पादों तक ही सीमित नहीं है। रोज़मर्रा में काम आने वाली चीज़ों जेसे जीरे से लेकर खाना पकाने के तेल और बेबी केयर आइटमों से लेकर दवाओं तक- हर तरह के नकली सामान बाज़ार में बेचे जा रहे हैं। सर्वेक्षण के अनुसार उपभोक्ताओं का मानना है कि बाज़ार में 25-30 फीसदी नकली उत्पाद बेचे जाते हैं, जो उद्योग जगत के अनुमान से अधिक है।’ भारत इस खतरे पर अंकुश लगाने के लिए क्या कर सकता है, इसके बारे में बात करते हुए श्री नकुल पसरीचा ने कहा, ‘‘देश को व्यापक, सक्रिय एवं समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा। हमें जागरुकता बढ़ाने, उचित समाधानों को लागू करने के लिए उल्लेखनीय बदलाव लाने होंगे, ताकि आपूर्ति श्रृंखला को नकली उत्पादों एवं इसमें संलिप्त अपराधियों से सुरक्षित बनाया जा सके। अपनी शुरूआत से ही ASPA ने भारत में नकली उत्पादों एवं जालसाज़ी से लड़ने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। हम इस दिशा में निरंतर प्रतिबद्ध हैं। आने वाले समय में भी हम सरकारी विभागों, ओद्यौगिक संगठनों एवं संस्थानों के साथ मिलकर नकली उत्पादों के खिलाफ़ भारत की लड़ाई को और सशक्त बनाते रहेंगे।’ सेक्टर विशिष्ट मुख्य बिन्दु 1.         फार्मास्युटिकल्सः o   उपभोक्ताओं के अनुसार इस क्षेत्र में नकली उत्पाद बाज़ार का 20 फीसदी हिस्सा हैं। o   शहरों के अनुसार नकली उत्पादों की सीमाः विभिन्न शहरों में उपभोक्ताओं के साथ किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक हैदराबाद में 32 फीसदी, इंदौर में 29 फीसदी, चेन्नई में 25 फीसदी और जालंधर में 23 फीसदी उपभोक्ताओं को नकली फार्मास्युटिकल उत्पादों का सामना करना पड़ा। o   कारणः आपूर्ति श्रृंखला में दक्षता की कमी तथा मांग एवं आपूर्ति के बीच अंतर o   उद्योग जगत द्वारा जालसाज़ी पर अंकुश लगाने के लिए अपनाए गए तरीकेः सिक्योरिटी लेबल, टेम्पर एवीडेन्ट सील, सिक्योरिटी टियर टेप, टैगर  फॉइल, सिक्योरिटी बिलीस्टर फॉइल और ट्रैक एवं ट्रेस। 2.         एफएमसीजीः o   उपभोक्ताओं के अनुसार इस क्षेत्र में नकली उत्पाद बाज़ार का 25-30 फीसदी हिस्सा हैं। o   शहरों के अनुसार नकली उत्पादों की सीमाः ज़्यादातर दूसरे एवं तीसरे स्तर के शहरों और गांवों में मौजूद o   कारणः कम लागत और असली उत्पादों की अनुपलब्धता…

  • बिजनेस रेमेडीज/ गांधीनगर, (हि.स)। देश का सेवा क्षेत्र निर्यात काफी बेहतर स्थिति में है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद चालू वित्त वर्ष…

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