Tuesday, September 27, 2022
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by Business Remedies
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चूरू जिले की रतनगढ़ विधानसभा सीट एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा है, जहां वर्ष 1952 के प्रथम आम चुनाव से लेकर 2018 में हुए 14वीं विधानसभा के चुनाव तक ब्राह्मण प्रत्याशी ही जीता है। इस क्षेत्र की एक खास बात यह भी रही है कि यहां मुकाबला भी ब्राह्मण प्रत्याशियों के मध्य ही रहा है। कांग्रेस इस सीट से केवल दो बार ही खाता खोल पाई और दोनों ही बार कांग्रेस के प्रत्याशी पंडित जयदेव प्रसाद इन्दौरिया ही रहे। आयुर्वेद में गहरी रुचि रखने वाले इंदौरिया की गिनती अच्छे वैद्य के रूप में की जाती थी।

रतनगढ़ से चार बार निर्दलीय प्रत्याशियों को जीतने का अवसर मिला। वर्ष 1952 के प्रथम आम चुनाव में पंडि़त महादेव प्रसाद विजयी हुए। वर्ष 1957 में किशना राम और 1962 में मोहनलाल निर्दलीय चुनाव जीते। पहली बार वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर जगदीश चन्द्र शर्मा जनता पार्टी के टिकट पर जीत कर पहली बार किसी राजनीतिक दल का खाता खोलने में कामयाब हुए। वर्ष 1980 में यानी पांचवीं विधानसभा के चुनाव में पहली बार जयदेव प्रसाद इन्दौरिया कांग्रेस का खाता खोलने में कामयाब रहे। यहां तक जनसंघ भी इस सीट से कभी चुनाव नहीं जीत पाया। वर्ष 1985 में पहली बार इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का खाता हरिशंकर भाभड़ा ने खोला और लगातार तीन बार वर्ष 1985, 1990 व 1993 में जीत कर पहले ऐसे विधायक बने, जिन्होंने हैट्रिक बनाई। लेकिन वर्ष 1998 में कांग्रेस के ही जयदेव प्रसाद इन्दौरिया से चुनाव हार गए। इस प्रकार इन्दौरिया ने वर्ष 1980 में भाभड़ा से हुई हार का बदला वर्ष 1998 में चुका लिया। इस चुनाव के बाद भाभड़ा इस क्षेत्र से विधायक नहीं बने। वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में भाभड़ा भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन पार्टी की आंतरिक गुटबाजी के चलते वे निर्दलीय राजकुमार रिणवां से हार गए। भाभड़ा ने रतनगढ़ से विधायक बनने के बाद राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष व राजस्थान का उप-मुख्यमंत्री बनकर राजस्थान में रतनगढ़ का नाम रोशन किया। वर्ष 2003 में निर्दलीय विधायक बने रिणवां ने बाद में भाजपा से नाता जोड़ लिया और 2008-2013 के दो विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर विजयी हुए। भाभडा के बाद रिणवां ऐसे दूसरे विधायक बने जिसने लगातार तीन चुनाव जीतकर हैट्रिक बनाई।

रिणवां को वसुंधरा राजे की सरकार में खान मंत्री बनने का भी अवसर मिला, लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बसपा से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके अभिनेष महर्षि को टिकट दे दिया और वे चुनाव भी जीत गए। महर्षि ने बसपा व कांग्रेस से चुनाव भी लड़ा लेकिन उन्हें राजनीतिक सफलता भाजपा में आने के बाद ही मिली। चूरू लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला रतनगढ़ क्षेत्र वर्ष 1952 में अस्तित्व में आया। यहां 1962 तक तीन विधानसभा चुनाव हुए। इसके बाद राजनीतिक कारणों से वर्ष 1967 व 1972 के चुनाव में रतनगढ़ को सुजानगढ़ में शामिल कर दिया गया, लेकिन वर्ष 1977 में रतनगढ़ सीट फिर से अस्तित्व में आ गई। रतनगढ़ सीट को भाजपा के लिए मजबूत गढ़ के रूप में देखा जाने लगा। कांग्रेस ने इस सीट को जीतने के लिए भाभड़ा के सामने अपने युवा चेहरे भी मैदान में उतारे, लेकिन संगठन के दम और भाभड़ा के कार्य ने उन्हें इस सीट से तीन बार जिताया। उनकी हार का कारण भी भाजपा कार्यकर्ता ही रहे।

उमेन्द्र दाधीच

@बिजऩेस रेमेडीज

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