Tuesday, September 27, 2022
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निर्यात में लग्नम स्पिनटेक्स लिमिटेड ने हासिल की 64 फीसदी की वार्षिक वृद्धि

by Business Remedies
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जयपुर। भीलवाड़ा आधारित यार्न निर्माता कंपनी लग्नम स्पिनटेक्स लिमिटेड ने टेक्सटाइल निर्यात क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करके सफलता का कीर्तिमान स्थापित किया है। निर्यात क्षेत्र में उच्च वृद्धि दर हासिल करने के लिए कंपनी को राजस्थान सरकार सम्मानित करेगी। इस संबंध में बिजनेस रेमेडीज की टीम ने कंपनी के चेयरमैन डी.पी.मंगल से कंपनी की कारोबारी शुरुआत और व्यक्तिगत अनुभव, निर्यात वृद्धि दर, निर्माण गतिविधि, ऋण, भावी योजना और सरकार से मांग जैसे विषयों पर चर्चा की।

  कंपनी की कारोबारी शुरुआत और आपके अनुभव के संबंध में बताइये?

डी.पी.मंगल: वर्ष 2010 में लग्नम स्पिनटेक्स लिमिटेड की स्थापना हुई थी। कंपनी की निर्माण इकाई भीलवाड़ा जिले के हमीरगढ़ रीको ग्रोथ सेंटर में 48000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में स्थित है। मैंने वर्ष 1973 में चार्टर्ड अकाउंटेंसी का कोर्स पूर्ण किया और वर्ष 1980 में देश की प्रमुख टेक्सटाइल मिल राजस्थान स्पिनिंग मिल में काम करके टेक्सटाइल क्षेत्र का वृहद अनुभव हासिल किया। कुछ नया करने और अनुभव का फायदा उठाने के लिए मैंने मेरे पुत्र आनंद मंगल के साथ मिलकर कंपनी की शुरुआत की। आज मेरे कारोबार में मेरे बड़े पुत्र सॉफ्टवेयर कंस्लटेंट शुभ मंगल भी पूर्णकालिक निदेशक के तौर पर अहम भूमिका निभा रहे हैं।

कंपनी की निर्माण गतिविधियों के संबंध में बताइये?

डी.पी.मंगल: वर्तमान में हमारी कंपनी लग्नम स्पिनटेक्स लिमिटेड में 25536 स्पिंडल्स, चार ओपन एंड मशीनें, 1920 रॉटर्स स्थापित है और कंपनी की प्रतिमाह निर्माण क्षमता ११०० टन यार्न की है। वर्तमान में कंपनी में हाई क्वालिटी रिंग एंड ओपन एंड,  कार्डेड एवं कॉम्ब यार्न व डबल यार्न, टीएफओ यार्न प्रमुखता से निर्मित किए जा रहे हैं जोकि डेनिम, टेरी टॉवल्स, निटिंग, बॉटम वियर्स, होम टेक्सटाइल और इंडस्ट्रीयल फैब्रिक्स निर्माण में काम आते हैं। कंपनी में 450 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है।

कंपनी के निर्यात के संबंध में बताइये?

डी.पी.मंगल: कंपनी ने वित्त वर्ष 2018-19 में 16.५३ करोड़ रुपए का निर्यात किया था। वित्त वर्ष 2019-20 में कंपनी ने 63.54 करोड़ रुपए का निर्यात किया था। 31 मार्च 2021 को समाप्त वर्ष में कंपनी ने 64 फ़ीसदी की वृद्धि दर के साथ 104.17 करोड़ रुपए का निर्यात किया है। कंपनी को निर्यात में उच्च वृद्धि दर हासिल करने के लिए टेक्सटाइल श्रेणी में २०१९-२० वर्ष के लिए राजस्थान सरकार द्वारा निर्यात पुरस्कार के लिए चुना गया है। कंपनी द्वारा मुख्य रूप से पुर्तगाल,  जर्मनी, साउथ अमेरीका, बांग्लादेश, चीन इत्यादि में यार्न का निर्यात किया जा रहा है। भारत से पूरी दुनिया में कॉटन यार्न का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं।

कंपनी के ऋण की क्या स्थिति है?

डी.पी.मंगल: कंपनी ने विस्तार योजना के लिए करीब 9४ करोड़ रुपए का ऋण लिया था। विस्तार इकाई निर्माण कार्य शुरू हो गया है और इससे कंपनी को आय प्राप्त होने लगी है। वर्तमान में लॉन्ग टर्म एवं शॉर्ट टर्म को मिलाकर कंपनी पर करीब 1६८ करोड रुपए का ऋण है। नियमित रूप से कंपनी द्वारा ऋण अदायगी की जा रही है और कंपनी प्रबंधन को उम्मीद है कि करीब 7 वर्षों में यह ऋण चुका दिया जाएगा। टेक्सटाइल उद्योग में काफी अधिक पूंजी की आवश्यकता पड़ती है और विस्तार योजनाओं के लिए ऋण लेना आवश्यक है।

कंपनी की भावी योजना के संबंध में बताइये ?

डी.पी.मंगल: कंपनी आने वाले 3 से 4 माह में निर्माण इकाई में 3.5 मेगावॉट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की योजना पर कार्य कर रही है। इसके साथ ही कंपनी मजबूत ऑर्डर बुक को वर्तमान परिस्थितियों में बनाए रखने के लिए प्रयास करती रहेगी। कंपनी का ध्येय गुणवत्ता युक्तउत्पाद बनाने का है। इससे बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के कंपनी को ऑर्डर मिलते रहते हैं। इसके साथ ही कंपनी कॉम्ब एवं टीएफओ यार्न निर्माण क्षमता भी बढ़ा रही है, जिससे कंपनी का रिलाईजेशन (प्राप्तियां) बढ़ेगा।

कॉटन की कीमतों व फॉरेन करेंसी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से किस प्रकार सामंजस्य करते हैं?

डी.पी.मंगल: कॉटन के साथ कॉटन यार्न की कीमतें भी बढ़ गई। मुझे लगता है की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कॉटन की कीमतों में कुछ कमी आएगी लेकिन   कोई बड़ी गिरावट की गुंजाइश कम लग रही है। हम कॉटन की खरीद कॉटन की फसल व क्वालिटी के अनुसार ही करते हैं। इसी प्रकार ऑर्डर के अनुसार ही फॉरेन करंसी को हमारे द्वारा कवर कर लिया जाता है। इस संदर्भ में कंपनी प्रबंधन का मानना है की एक कंपनी उतार-चढ़ाव के बजाय  अपना फोकस निर्माण पर रखती है।

टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा मिले, इसके लिए आप सरकार से क्या चाहते हैं?

डी.पी.मंगल: राज्य में पॉवर के दाम अन्य राज्यों के मुकाबले सर्वाधिक हंै। टेक्सटाइल इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा लागत पॉवर की आती है। अधिक पॉवर लागत के कारण यहां की पॉवर आधारित निर्माण इकाइयां अन्य राज्यों में स्थित इकाइयों से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रही है। इसलिए राज्य में पॉवर आधारित निर्माण इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए सरकार को पॉवर की कीमतों में कमी करनी चाहिए।

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