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हम किसी से कम नहीं : डॉ. राज रश्मि म.सा.

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। जयपुर मानसरोवर के किरण पथ स्थित महावीर भवन में वर्षावास हेतु विराजित महाश्रमणी राजस्थान सिंहनी गुरुमाता महासती पुष्पवती (माता) म.सा. आदि ठाणा-7 के पावन सान्निध्य में पर्वाधिराज पर्युषण में धर्म ध्यान का ठाठ लगा हुआ है।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपप्रवर्तिनी मरूधरा शिरोमणि सदगुरुवर्या डॉ. राजमती म.सा. ने फरमाया कि सेवा एक तप है। सेवा वो ही कर सकता है जिसमें समर्पण की भावना हो। कुछ लोग अपने अथवा धन के झूठे अहंकार में यह मान बैठते हैं कि सेवा करना छोटे लोगों का काम है। हम बड़े हैं, हमारा काम सेवा करना नहीं सेवा लेना है। ऐसे लोगों के यह धारणा गलत हैं। तीन खंड के अधिपति अपार ऐश्वर्यशाली कृष्ण ने अपने हाथों से ईंटें उठाकर वृद्ध की सेवा की। सेवा करना उच्च कोटि का मैत्रीभाव है। जैन धर्म में सेवा को वैयावृत्य के नाम से आभ्यंतर तप कहा गया है। इसके द्वारा व्यक्ति तीर्थंकर गौत्र का उपार्जन कर लेता है। तन, मन, धन से यथा संभव निष्काम भावना से की गई सेवा अवश्य आनंद देने वाली होती है।
डॉ. साध्वी राज रश्मि म.सा. ने कहा कि जब तक है भीतर अहंकार का रोग तब तक भोग और त्याग में कोई अंतर नहीं लगता। तप का अहंकार भी नीचे गिराने वाला होता हैं। मान सामान्य व्यक्ति में पाया जाता है और मिथ्याभिमान मूढ़ व्यक्ति में पाया जाता है। स्वाभिमान महाराणा प्रताप जैसे मनस्वी में होता है तो निराभिमानता वीतरागी में होती है। आज के व्यक्ति में मिथ्या अभिमान पाया जाता है, क्योंकि हाथ पैर में दम नहीं फिर भी कहते हैं हम किसी से कम नहीं।
निर्भीक वक्ता डॉ. साध्वी राजऋद्धि म.सा. ने कहा कि धन, यौवन, सत्ता और अविवेक जहां ये चारों मिल जायें वहां अनर्थ होना ही हैं। अंतकृत दशांग सूत्र के माध्यम से अर्जुनमाली का दृष्टांत बताते हुए कहा कि खराब से खराब व्यक्ति में सुधरने की संभावना है।
वीर पिता कमलेश जैन ने जानकारी दी कि पर्युषण पर्व के पंचम दिवस में अंतकृतदशांग सूत्र एवं कल्पसूत्र पर आधारित प्रवचन के साथ ही सेवा दिवस के रूप में आज का दिवस मनाया गया। धर्मसभा में सुशीला सिंघवी के 27 उपवास, दिनेश शाह के सात उपवास, अनिल जारोली के पांच उपवास, दीपिका धूपिया के आयंबिल अ_ाई एवं अनेक तपस्वियों के उपवास, बेला, तेला, चौला पंचोला, उपवास, आयंबिल, एकाशन, बियासन आदि तप के भी प्रत्याख्यान करवाएं गये।
प्रवचन पश्चातï् ‘चौबीस तीर्थंकर नाम एवं लक्षण’ प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वहीं दोपहर 3 बजे से कल्प सूत्र एवं 32 आगमों में विपाक सूत्र की वाचनी की गई।
पर्युषण पर्व के पंचम दिवस के समस्त आयोजनों में वात्सल्य प्रभावना के लाभार्थी बुद्धि प्रकाश लोढ़ा परिवार, गुमान सिंह कवाड़ परिवार, मानसरोवर जयपुर रहे। श्री संघ की ओर से सभी लाभार्थी परिवारों का आभार व्यक्त किया गया।

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