Home प्रादेशिक रेगिस्तान भी हरे हो जाते हैं जब अपनों के साथ अपने खड़े हो जाते हैं, राजस्थान बजट पूर्व परामर्शदात्री कमेटी में मुख्यमंत्री को सुझाव दिए : एन.के. जैन

रेगिस्तान भी हरे हो जाते हैं जब अपनों के साथ अपने खड़े हो जाते हैं, राजस्थान बजट पूर्व परामर्शदात्री कमेटी में मुख्यमंत्री को सुझाव दिए : एन.के. जैन

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। राजस्थान बजट २०२२-२३ के लिए फिक्की व दी एम्प्लॉयर्स एसो. ऑफ राजस्थान ने सुझाव दिए है।
राजस्थान में नया निवेश आये, मजबूत उद्योगपति आयें और अपना उद्योग स्थापित करें, जिससे सरकार का राजस्व बढ़े व रोजगार में भी वृद्धि हो और प्रदेश विकास के नये सोपान तय करें इस हेतु फिक्की राजस्थान व दी एम्प्लॉयर्स एसो. ऑफ राजस्थान ने सुझाव प्रेषित किए हैं, जो इस प्रकार है।
१. उद्यम पथ योजना लागू हो : सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, पीएसयू, नगर निगम व अन्य राज्य सरकार के उपक्रम तकनीकी रुप से प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं वे हमारे आईटीआई व पॉलिटेक्निक में प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार देकर तत्काल ही लाभांवित होकर उच्च विकास पथ पर अग्रसर हो। आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सामाजिक समरसता भी प्राप्त कर सकते हैं। इस हेतु राज्य सरकार पहल कर अग्निपथ योजना की तर्ज पर ‘‘उद्यम पथ’’ योजना शुुरु कर प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार प्रदान करें और अग्निपथ योजना के समान अपना अल्प कार्यकाल पूर्ण होने पर विभिन्न ट्रेड्स व निर्माण कार्यों में अनुभवी और प्रशिक्षित युवाशक्ति‘‘उद्यम वीर’’ के रुप में निश्चित रुप से या तो निजी उद्यमों में समाहित होंगे या स्वयं के स्वतंत्र व्यवसाय चलाने में सक्षम होंगे। स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टैंडअप इंडिया आदि योजनाएं भी इस प्रकार से प्रशिक्षित ‘‘उद्यम वीर’’ युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी।
२. एमएसएमई क्रेडिट कार्ड : वर्तमान में चल रहे उद्योगों को राहत देनी चाहिए, ताकि पोस्ट कोविड परिस्थितियों में वे उपनी वित्त की जरुरत समय पर पूरी कर सकें और बैंकों की अनावश्यक कागजी कार्यवाही से समय जाया ना करना पड़े।
३. कई बार एनजीटी व पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुचित आदेशों से या अनावश्यक हस्तक्षेप के चलते उद्योग बंद हो जाते हैं या नये रोजगारन्मुखी उद्योग राज्य में आने से वंचित रह जाते हैं। इस पर दोनों पक्षों की बात सुनने व निर्णय करने हेतु एक उच्च राज्य स्तरीय कमेटी का गठना करना चाहिए (जैसा कि अभी हाल ही में कोटा में घडिय़ाल सेंचुरी के बारे में निर्णय दिया गया, जिससे अनेकों चलते हुए उद्योगों पर संकट आ गया।)
४. लेण्ड सेस, वाटर सेस, अरबन डबलपमेंट सेस, व फायर सेस : ये सभी सेस विकास की बाधाएं हैं, इनको तुरंत समाप्त कर स्थापित उद्योगों व नये आने वाले निवेशकों को छूट दी जाए। विशेषकर फायर सेस व लेण्ड सेस को समाप्त कर देना चाहिए।
५. बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन वर्कस वेलफेयर सेस : राज्य सरकार बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन वर्कस वेलफेयर सेस अधिनियम (क्चह्रष्टङ्खङ्ख ष्टद्गह्यह्य) के तहत नोटिस जारी कर रही है। ऑफिसर असेसमेंट असेसमेंट के दौरान ब्याज और पेनल्टी भी लगा रहे हैं, जो विधि के प्रावधानों के विरूद्ध है। राजस्थान सरकार के अलावा अन्य कोई भी राज्य सेस के ऊपर ब्याज और पेनल्टी नहीं लगा रहा है केवल मात्र राजस्थान ही एक मात्र राज्य है जो सेस के साथ-साथ ब्याज और पेनल्टी लगा रहा है। अगर कोई व्यक्तिएसेसमेंट के बाद भी पैसा जमा नहीं करता है तो ब्याज और पेनल्टी लगनी चाहिए। राज्य सरकार को इस पर समुचित गाइडलाइंस अपने अधिकारियों को देनी चाहिए, जिससे आम जनता अनावश्यक रूप से परेशान ना हो।
६. सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के अंतर्गत सेंट्रल इन्सपेक्शन सिस्टम में सुधार हो : मेन्यूफेक्चरिंग इंडस्ट्रीज के सीआईएस इन्सपेक्शन में नई गाईडलाइंस के अनुसार श्रम विभाग, फेक्ट्री व बॉयलर विभाग के जाइंट इन्सपेक्शन की व्यवस्था कर दी गई है। श्रम विभाग के निरीक्षक एक क्वार्टर (तीन महीने में) में चार-चार बार निरीक्षण के लिए पहुंच जाते हैं, जबकि फेक्ट्री व बॉयलर विभाग में निरीक्षकों की कमी की वजह से जाईंट इन्सपेक्शन कम्पलीट नहीं हो पाता है। अत: कम्पलाईंस की जाईंट इन्सपेक्शन रिपोर्ट क्लोज नहीं हो पाती है। अब सभी कम्पलाईंस रिपोर्ट ऑनलाईन है फिर अनेकों बार निरीक्षक का उद्योगों में जाना अखरता है। इस व्यवस्था का या तो सुचारु किया जाये या बंद किया जाये और ऑनलाईन रिटर्न को कम्पलीट माना जाये।
७. २०० करोड़ या उससे ज्यादा के नये निवेश पर औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि नि:शुल्क प्रदान की जाए, बशर्तें ३ वर्ष की अवधि में उद्योग में उत्पादन शुरु हो।
८. रिको में ८० प्रतिशत भूखंड ‘‘पहले आओ पहले पाओ’’ के आधार पर एमएसएमई को एलॉट किये जाये शेष २० प्रतिशत कार्नर प्लाट या प्राईम लोकेशन भूखंडों को ही ऑक्शन में शामिल किया जाये।
९. थष्र्ट सेक्टर उद्योगों जैसे ई-व्हीकल, लिथियम आयन बैट्री सेमी कंडक्टर इंगट्स व चिप्स, कचरे से बिजली बनाना, स्टील प्लांट, युवाओं को कुशल बनाने हेतु, स्किल यूनिवर्सिटी, सोलर मॉड्यूल मेन्यूफेक्चरिंग व केप्टीव पावर जनरेशन, फूड प्रोसेसिंग, एग्री प्रोसेसिंग, होटल, ट्यूरिज्म व एमएसएमई का बिजली फिक्स रेट जैसे रू. ६/- प्रति यूनिट पर देनी चाहिए।
१०. प्रत्येक जिले में रिटायर्ड अनुभवी उद्योग विभाग से जुड़े अफसरों की टीम बनानी चाहिए, जिसमें एक सीए को भी जोडऩा चाहिए जो के औद्योगिक क्षेत्रों में कर व कैम्प लगाकर एमएसएमई उद्योगों को रिप्स व सरकार की अन्य लाभदायी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करे व उद्यमियों को अच्छे से समझाएं व जरुरत पडऩे पर ऑन द स्पॉट फार्म भरवाकर सभी फार्मेलिटीज पूर्ण करवाकर निश्चित समयसीमा में उसका लाभ उद्योगों को दिलवाए व इसकी समीक्षा प्रत्येक तिमाही में जिला कलैक्टर की अध्यक्षता में अवश्य हो और कोई भी शिकायत या कमी पाए जाने पर उसका ऑन द स्पॉट निवारण हो। इससे सही समय पर सही उद्यमियों को लाभ मिलेगा, उद्योग चलेंगे रोजगार बढ़ेगा व प्रदेश विकास करेगा।
११. मुख्यमंत्री लद्यु उद्योग प्रोत्साहन योजनान्तर्गत लक्ष्यों के अभाव में योजना का पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा अत: लक्ष्यों की सीमा को हटाया जाये या जयपुर जिले में १ करोड़ से अधिक के लक्ष्य बढ़ाया जाये।
१२. पूर्व की भांति रीको के भू-खंड आवंटन में महिलाओं एवं आर्थिक पिछड़ा वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को भी शामिल कर ५० प्रतिशत राशि का आवंटन किया जावें। वर्तमान में लागू डॉ. भीवराव अंबेडकर दलित एवं आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना में महिला उद्यमी या आर्थिक पिछड़ा वर्ग के उद्यमियों को भी लाभांवित किया जावें।
१३. रिप्स-२०२२ पॉलिसी : राज्य सरकार द्वारा रिप्स-२०२२ पॉलिसी जारी कर दी गई है, परंतु वित्त विभाग द्वारा लैंड कन्वर्जेन चार्ज की छूट हेतु नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। नोटिफिकेशन जारी करवाने का कष्ट करें, ताकि नई इंडस्ट्रीज के सृजन का मार्ग प्रशस्त हो, स्टाम्प ड्यूटी से तो छूट मिल रही है, परंतु कन्वर्जेन के समय ऑनलाईन आवेदन पर विभाग का सॉफ्टवेयर में, अथॉरिटी का नाम सबमिट का ऑप्शन नहीं मिलता, जिससे आवेदन अधूरा रहता है ये राज्य स्तर की समस्या हैं, कृपया समाधान करवायें। राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना में परिलाभ, जैसे स्टाम्प ड्यूटी, रुपान्तरण शुल्क का लाभ एक साथ ही (१०० प्रतिशत) दिया जावे न की स्टेप में।
१४. मार्च २०२२ तक जिला उद्योग केन्द्रों में प्राप्त ऑन लाईन मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना का ब्याज अनुदान दिया जावे।
१५. प्रत्येक जिले में एमएसमएमई के लिए डेडिकेटेड आर एण्ड डी सेंटर खोलना चाहिए, जहां हर प्रकार की आईएमआई मानकों के अनुरुप हो।
१६. ऑटो डिसबर्सल व पीएलआई स्कीम को सुलभ व सरल बनाना चाहिए।
१७. राज्य के टेण्डर में में एमएसएमई के लिए टर्नओवर व उत्पादन की लिमिट समाप्त कर गुणवत्ता पर फोकस करना चाहिए व एमएसएमई का १५ प्रतिशत प्राईस प्रेफेरेंश व ५० प्रतिशत परचेज प्रेफेरेंश देना चाहिए।
१८. राज्य की अपनी जल नीति की घोषणा जल्दी हो
१९. सोलर प्लांट लगाने पर उद्योगों को पुन: २० प्रतिशत सब्सिडी देना प्रारंभ करे।
२०. बीड़ी मेन्यूफेक्चरर्स को बीड़ी सिगार एक्ट में पहले हर तीन साल में लाईसेंस रिन्यू करवाना पड़ता था जिसे अब प्रत्येक वर्ष रिन्यू जारी कर दिया है, जिससे उद्यमी को अनावश्यक कागजी कार्यवाही व तीन गुना लाईसेंस फीस देनी पड़ रही है। अत: पांच साल में लाईसेंस रिन्यू की गाईड लाईन जारी की जानी चाहिए।
२१. पेट्रोल व डीजल पर वैट को घटाकर राजस्थान की आम जनता को राहत देनी चाहिए।
२२. फ्यूल सरचार्ज : उद्योगों से बिजली के बिलों में अनेकों प्रकार के फ्यूल सरचार्ज लगाये जाते है। कभी अडानी, कभी कोयले के महंगे भावों में खरीद आदि कारणों से। हमारा अनुरोध है कि ये फ्यूल सरचार्ज जिस वर्ष का है उसी वर्ष में लेना चाहिए अन्यथा नहीं, जबकि ऐसा होता नहीं है। इस संबंध में रेगूलेटरी बॉडी ले, २०१६ में एक नियम लागू किया गया था, जिसका उल्लंघन समस्त विद्युत वितरण निगम कर रहे हैं और उद्यामियों को ये दिक्कत है कि जो माल हम कॉस्टिंग करके बेच चुके उस साल का फ्यूल सरचार्ज बाद में पेमेंट करने पर हम अपने खरीददार से कैसे वसूलें?
२३. पिछले बजट घोषणा में १४७ उपखंडों में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का काम तेजी से किया जाये, ताकि नये निवेशकों का कम व वजिब दाम पर उनके आस-पास औद्योगिक जमीन उपलब्ध हो सके।
२४. रिप्स-२०२२ में टर्नओवर लिंक इंसेटिव/केपीटल सब्सिडी के क्लेम की निवेश लिमिट को घटाकर ५ करोड़ करना चाहिए, जो कि अभी ५० करोड़ है, ताकि ज्यादा से ज्यादा एमएसएमई इसका लाभ ले सके।
इस अवसर पर दी एम्प्लॉयर्स एसो. ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष एन.के. जैन ने मुख्यमंत्रीजी को संबोधित करते हुए कहा कि कोई भी राज्य केवल मानचित्र द्वारा परिभाषित भू-भाग का अंश नहीं बल्कि हमारी विकास हेतु बनाई गई नीतियां, यहां भी सभ्यता, संस्कृति और नेतृत्व की विचारधारा की जीवंत रुप होता है। हमारा मूल मिशन होना चाहिए स्वस्थ, समृद्ध, फलता-फूलता व्यक्ति, समाज, उद्योग, व्यापार व राज्य।
हमें युवाओं की बेरोजगारी के दंश को दूर करने के प्रयास भी करने होंगे व एमएसमएई को भी सहायता भरा हाथ देना होगा, क्योंकि कोरोना के बाद एक तरह का सूखा उद्योग व व्यापार जगत में आया है और रूस-यूक्रेन युद्ध व यूरोप की विकट परिस्थितियों ने इस सूखे को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है अत: हमारा आपके पूरे मंत्रिमंडल व अधिकारियों की टीम से गुजारिश है कि इस सूखे को दूर करने के लिए हमारे साथ खड़े रहें, सहयोग करें व हमारे सुझावों को बजट में शामिल करें, क्योंकि ‘‘रेगिस्तान भी हरे हो जाते हैं जब अपनों के साथ अपने खड़े हो जाते हैं’’

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