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पुष्कर में प्रभा मिश्रा का सबसे ज्यादा प्रभाव 

अजमेर जिले की पुष्कर विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा और लगातार चार बार चुनाव जीतने का रिकार्ड केवल प्रभा मिश्रा के नाम रहा। वे चार बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुनी गई। इनके बाद रमजान खान को तीन बार विधायक बनने का अवसर मिला। इसी प्रकार सुरेश रावत को भी क्षेत्र की जनता ने लगातार दो बार चुनाव जिताया। पुष्कर से विधायक चुने गए जन प्रतिनिधियों में रमजन खान पहले ऐसे नेता है जिन्हे राज्य सरकार में मंत्री बनने का अवसर मिला। राज्य की भाजपा सरकार में वे पहले अल्पसंख्यक समुदाय से मंत्री बने। इसी प्रकार वे भाजपा के राजस्थान में प्रथम मुस्लिम विधायक भी रहे। रामजन्मभूमि आंदोलन में भी रमजान खान भाजपा के कार्यक्रमों में खुल कर भाग लेते थे। वे वर्ष 1985,1990 और 1998 के विधानसभा चुनाव में पुष्कर से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते। इससे पहले भाजपा ने रमजान खान को वर्ष 1980 के चुनाव में मसूदा सीट से टिकट दिया परन्तु वे कांग्रेस के सय्यद मोहम्मद अयाज मेहराज से थोड़े से वोटों से हार गए।

पुष्कर सीट से भाजपा के टिकट पर सबसे ज्यादा 5 बार चुनाव भी रमजान खान ने ही लड़े। वे एक जमाने में राजस्थान की भाजपा में एक मात्र राज्य स्तरीय मुस्लिम चेहरा रह चुके है। प्रभा मिश्रा ने सबसे पहले वर्ष 1957 के चुनाव में निर्दलीय केशव सेन को हराया। इसके बाद 1962 में जनसंघ के देवी सिंह 1967 में भी जनसंघ के एस. सिंह और 1972 में निर्दलीय जनार्दन को हराकर लगातार चार चुनाव जीते। वर्ष 1977 में पहली बार गैर कांग्रेसी प्रत्याशी के रुप में जनता पार्टी के टिकट पर चिरंजीलाल गर्ग को सफलता मिली लेकिन 1980 के चुनाव में फिर से कांग्रेस की प्रत्याशी सुरजी देवी मल्होत्रा चुनाव जीत गई।  वर्ष 1993 के चुनाव में कांग्रेस ने अजमेर से सांसद रहे विष्णु मोदी को मैदान में उतारा तो मोदी चुनाव जीत गए और 2003 के चुनाव में भी कांग्रेस के डॉ. गोपाल बाहेती को सफलता मिली। इन दोनों चुनाव में भाजपा ने रमजान खान को ही मुकाबले में उतारा था। वर्ष 2008 के चुनाव में कांग्रेस की नसीम अख्तर इंसाफ चुनाव जीती। वे रमजान खान के बाद पुष्कर से दूसरी ऐसी विधायक बनी जो मंत्री बनी। इनके बाद वर्ष 2013 और 2018 के चुनाव में भाजपा सुरेश रावत विजयी हुए उन्हें भी राज्य की भाजपा सरकार में संसदीय सचिव बनने का अवसर मिला। पुष्कर की प्रथम विधायक रही प्रभा मिश्रा मूलत: शाहबाद हरदोई की निवासी थी। 13 वर्ष की अल्प आयु में ही उनका विवाह हजारी लाल मिश्रा जो की रेलवे में बाबू थे, उनके पुत्र सुख देव प्रसाद मिश्रा से हुआ। विवाह के बाद उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और एम.ए. आगरा से करने के बाद सरकारी कॉलेज अजमेर से एलएलबी की छात्र राजनीति में सक्रिय रहने के कारण उन्हें कांग्रेस ने पुष्कर से विधायक का टिकट दिया। वे जीवन पर्यन्त चुनाव जीतती रही। अजमेर जिले की राजनीति में उन्हे दबंग महिला नेता के रुप में पहचान मिली।

उमेन्द्र दाधीच

@ बिज़नेस रेमेडीज

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