Home मुख्य न्यूज़ स्लाइड पुरुषों में कैंसर से होने वाली मौतों में सबसे बड़ा कारण फेफड़ों का कैंसर

पुरुषों में कैंसर से होने वाली मौतों में सबसे बड़ा कारण फेफड़ों का कैंसर

by Business Remedies
0 comment


बिजऩेस रेमेडीज/जयपुर
आज फेफड़ों का कैंसर बड़े स्तर पर पूरी दुनिया में फैला हुआ है। दुनियाभर में जितनी जानें स्तन, आंत और प्रोस्टेट के कैंसर मिलकर भी नहीं ले पाते, उससे अधिक जानें अकेले फेफड़ों के कैंसर से चली जाती हैं। छोटे-मोटे लक्षणों से शुरू होने वाला यह कैंसर एक समय बाद ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है जब इसका इलाज किया जाना संभव नहीं हो पाता। लोगों को फेफड़ों के कैंसर के प्रति जागरुक करने के उद्देश्य से नवम्बर माह लंग कैंसर अवेयरनेस मनाता है। इस अवसर पर फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल के विशेषज्ञ इस कैंसर की अक्रामकता और इलाज के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
फोर्टिस हॉस्पिटल के सीनियर मेडिकल ऑकोलॉजिस्ट डॉ. दिवेश गोयल ने बताया कि आज फेफड़ों का कैंसर महामारी की तरह फैला हुआ है। पुरुषों की बात करें तो विश्व में कैंसर से होने वाली पुरुषों की मौतों में फेफड़ों का कैंसर सबसे बड़ा कारण है, वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद, फेफड़ों का कैंसर दूसरा बड़ा कारण है। हर साल विश्व में 1.3 मिलियन लोगों में फेफड़े के कैंसर की पहचान होती है और इनमें से 1.1 मिलियन लोगों की इस कैंसर के कारण मृत्यु हो जाती है। 2020 के डाटा के अनुसार सभी कैंसर पेशेंट्स में करीब 5.5 प्रतिशत लोग लंग कैंसर से पीड़ित होते हैं, वहीं पुरुषों में होने वाले कैंसर की बात करें, तो 8 प्रतिशत पुरुष लंग कैंसर की चपेट में आ जाते है। इन गंभीर कारणों को देखते हुए हमें इस कैंसर के प्रति जागरूक होने की काफी आवश्यकता है।
फेफड़ों के कैंसर के प्रमुख लक्षणक है कफ आना और कफ में खून आना, सांस लेने में कठिनाई, वजन कम होना, छाती में दर्द रहना, भूख में कमी, आवाज में परिवर्तन, हड्डियों में दर्द रहना आदि। धूम्रपान इसका सबसे बड़ा कारण है।
धूम्रपान करना हमेशा से हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रहा है। फेफड़ों के कैंसर में धूम्रपान सबसे बड़ा कारण है। फेफड़ों के कैंसर के 94 प्रतिशत मामले धूम्रपान के कारण होते हैं। हालांकि इसमें व्यक्ति कब से धूम्रपान कर रहा है और कितनी मात्रा में कर रहा है यह भी निर्भर करता है। अगर कोई व्यक्ति रोज बीड़ी या सिगरेट का एक पैकेट पी रहा है तो उसके फेफड़ों के कैंसर होने का खतरा 30 से 60 प्रतिशत तक है और अगर यह काम वह पिछले 40 साल से कर रहा है तो यह 100 प्रतिशत तक चला जाता है। इसका नुकसान सिर्फ धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके आस-पास रहने वाले अन्य व्यक्ति, जो धूम्रपान नहीं करते उन्हें भी होता है। सेकेंड हैंडस्मोकिंग से फेफड़ों के कैंसर का खतरा तीन से पांच प्रतिशत बढ़ जाता है। धूम्रपान के बाद वायु प्रदूषण दूसरा सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा यूरेनियर, रेडिएशन के संपर्क में रहना भी अन्य कारण है।
डॉ. दिवेश ने बताया कि शुरूआती लक्षणों में मरीज की एक्स-रे, सीटी स्कैन, पेट स्कैन, बोन टेस्ट द्वारा इसकी पहचान की जाती है। इसके बाद बायोप्सी कर कैंसर की स्टेज का मालूम किया जाता है। बायोप्सी होने के बाद टारगेटेड और इम्यूनोथैरेपी का इलाज चुनने के लिए कुछ अन्य टेस्ट जैसे ईजीएफआर, एल्क, रोश, पीडीएल बायोप्सी ब्लॉक पर किये जाते हैं। इसके बाद अगर कैंसर पहली से तीसरी स्टेज के बीच होता है तो सर्जरी, कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी की जाती है। वहीं अगर यह अंतिम स्टेज पर होता है तो इम्यूनोथैरेपी, टारगेटेड थैरेपी और कीमोथैरेपी द्वारा कैंसर के लक्षणों की प्रगति को रोका जाता है और मरीज के जीवन की गुणवत्ता को सुधारा जाता है। इम्यूनो और टारगेटेड थैरेपी के आने के बाद केसों में बचाव की दर बढ़ी है। इसके अलावा, हाई रिस्क पेशिएंट्स के लिए स्क्रीनिंग के तौर पर कम खुराक वाले सीटी स्कैन से जल्द पहचान हो जाने पर फेफड़े के कैंसर से होने वाली मौतों को 14 से 20 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

You may also like

Leave a Comment