Thursday, August 11, 2022
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तीन दिवसीय शिल्पशाला में प्रदेश की हस्तशिल्प कला को दिया जायेगा बढ़ावा : उद्योग आयुक्त

by Business Remedies
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जयपुर। प्रदेश की हस्तशिल्प कला को संरक्षित व सवंर्दि्धत करने के लिए बच्चों, युवाओं, युवतियों और परंपरागत शिल्प से जुडऩे के इच्छुक कलाकारों को शिल्प शाला में हस्तशिल्प के गुर सिखाएं जाएंगे। उद्योग आयुक्त डॉ. कृष्णा कांत पाठक ने बताया कि पांच दिवसीय शिल्पशाला का आयोजन भारतीय शिल्प संस्थान के सहयोग से उद्योग विभाग के उद्यम प्रोत्साहन संस्थान द्वारा 24 जून से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दस वर्ष और इससे अधिक आयुवर्ग के कोई भी इच्छुक भारतीय शिल्पकला संस्थान की वेबसाइट 222.द्बद्बष्स्र.ड्डष्.द्बठ्ठ/ पर ऑनलाईन या सीधे ही भारतीय शिल्प संस्थान या उद्योग विभाग में 21 जून तक कार्यालय समय में पंजीयन कर सकते हैं। शिल्पशाला का आयोजन झालाणा स्थित भारतीय शिल्प संस्थान में किया जाएगा। पांच दिवसीय शिल्पशाला में नि:शुल्क होगी, केवल 200 रु. प्रति प्रतिभागी पंजीयन शुल्क देना होगा।
आयुक्त डॉ. पाठक ने भारतीय शिल्प कला संस्थान व उद्यम प्रोत्साहन संस्थान के अधिकारियों के साथ बैठक में शिल्प शिक्षा के संभावित षिल्पों का चयन किया। उन्होंने बताया कि पांच दिवसीय शिल्प शिक्षा के लिए पहले चरण में 14 शिल्पों का चयन किया गया है। इनमें लाख, मीनाकारी, टाई एण्ड डाई (बंधेज/लहरिया), मिट््टी के बर्तन/टेराकोटा, मिनियेचर पेंटिंग, पेपर मैशेे, ब्लाक प्रिटिंग, तारकशी, उस्ता कला, चर्म शिल्प, ब्लू पॉटरी, डेको पेज आर्ट, लैण्डस्केपिंग पेंटिंग और मेंहदी कला आदि को शामिल किया है। उन्होंने बताया कि पांच दिवसीय शिल्पशाला में विशेषज्ञों द्वारा संबंधित शिल्प की बारिकियों को व्यावहारिक रुप से समझाया जाएगा।
डॉ. पाठक ने बताया कि किसी भी शिल्प या कला की शिक्षा के लिए कम से कम दस प्रतिभागी होना आवश्यक होगा। उन्होंने बताया कि शिल्प शाला में प्रतिभागियों को केवल दो सौ रु. में पंजीयन कराना होगा। इसके अलावा प्रतिभागियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उद्योग विभाग का इस तरह की यह अनूठी पहल है। शिल्पशाला के आयोजन के माध्यम से उद्योग विभाग विशेषज्ञों और इन कलाओं को सीखने के इच्छुकों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने जा रहा है। जिससे इन कलाओं का संरक्षण संवर्द्धन होने के साथ ही नई पीढ़ी को इन शिल्पों से जोड़कर उन्हें हस्तशिल्पी और एंटरप्रोन्योर बनाने की राह दिखाई जा सकेगी। इसके साथ ही लघु एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सकेगा। आयुक्त डॉ. पाठक ने कहा कि शिक्षा में शिल्प गुरुओं, पुरस्कृत शिल्पकारों, राज्य की इस क्षेत्र में कार्य कर रहे संस्थाओं को जोड़ा जा रहा है, ताकि समग्र रुप से यह प्रयास प्रदेश की हस्तकलाओं को संरक्षित, संवंर्दि्धत करतेे हुए नई पहचान दिला सके।
बैठक में भारतीय शिल्प संस्थान की उपनिदेशक प्रोजेक्ट्स लक्ष्मी पारीक, उद्यम प्रोत्साहन संस्थान के एमडी संजीव सक्सैना, ईडी एसएस शाह और सहायक निदेशक प्रचार डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा ने भी सुझाव दिए।

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