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जलमार्ग लगाएंगे प्रगति को नए पंख

by Business Remedies
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही वाराणसी में दुनिया के सबसे लंबे रिवर क्रूज-एमवी गंगा विलास के साथ कई अन्य अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत में नदी जलमार्ग की क्षमता का लाभ लेने के नए दौर का सूत्रपात हो रहा है। वस्तुत: देश में लंबे समय से जल परिवहन में शामिल अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय नौवहन के विकास की आवश्यकता महसूस की जा रही है। जिन जलमार्गों को देश का प्राकृतिक पथ कहा जाता है वे अतीत में भारतीय परिवहन की जीवन रेखा हुआ करते थे। ये जलमार्ग शताब्दियों से कारोबार, उद्योग और आर्थिक शक्ति का मुख्य आधार हुआ करते थे, लेकिन अंग्रेजों के आगमन के बाद जलमार्गों की लगातार उपेक्षा हुई। खासतौर से बीती एक शताब्दी में भारत में जल परिवहन क्षेत्र बेहद उपेक्षित होता चला गया। देश की आजादी के बाद भी सडक़, रेल और वायुमार्गों की होड़ में परंपरागत जीवनदायी जलमार्ग नजरअंदाज होते गए। ज्ञातव्य है कि देश में 7,500 किलोमीटर लंबा समुद्री तट और करीब 14,500 किलोमीटर संभावित नौवहन योग्य जलमार्ग है। देश को इस विशाल नदी मार्ग पर हमेशा बहती रहने वाली नदियों, झीलों और बैकवाटर्स का उपहार भी मिला हुआ है।
गौरतलब है कि देश नदी जलमार्गों की प्राचीन शक्ति का उपयोग करने के लिए रणनीतिक रूप से आगे बढ़ रहा है। इसके लिए देश की बड़ी नदियों में जलमार्ग विकसित करने के लिए नया कानून और विस्तृत कार्ययोजना लाई गई है। 2014 में देश में केवल पांच राष्ट्रीय जलमार्ग थे, अब 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं। परिणामस्वरूप नदी जलमार्ग के माध्यम से कार्गो परिवहन में पिछले आठ साल में तीन गुना वृद्धि हुई है। पहले यह आंकड़ा 30 लाख मीट्रिक टन था। जलमार्ग पर्यावरण की रक्षा के लिए भी अच्छे हैं और पैसे की भी बचत करते हैं। जलमार्गों के संचालन की लागत सडक़ मार्गों की तुलना में ढाई गुना कम है और रेलवे की तुलना में एक तिहाई कम है। यही कारण है कि चीन और अमेरिका सहित कई यूरोपीय देशों ने जैसे-जैसे विकास की ओर कदम बढ़ाए वैसे-वैसे वे अपने जलमार्गों का अधिक उपयोग करने लगे। कई यूरोपीय देश अपने कुल माल और यात्री परिवहन के लिए जल परिवहन का बहुतायत में उपयोग करते हैं। इतना ही नहीं यूरोप के कई देश आपस में इसी साधन से बहुत मजबूती से जुड़े हुए हैं। उन्होंने जलमार्गों को अपनी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बना लिया है।
्रयहां यह उल्लेखनीय है कि भारत की नई लाजिस्टिक नीति और गतिशक्ति योजना का आगाज अभूतपूर्व रणनीतियों के साथ हुआ है। इनके तहत जल परिवहन के विकास से लाजिस्टिक लागत के बोझ को घटाया जा सकता है। इसी तरह से मैरीटाइम इंडिया मिशन देश के बंदरगाहों के विकास और लाजिस्टिक लागत घटाकर समुद्री अर्थव्यवस्था से देश को लाभान्वित करने से संबंधित है। इसके तहत बंदरगाहों के विकास के साथ ही जलमार्गों का विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। भारत सागरमाला परियोजना के तहत 574 से अधिक बंदरगाहों के विकास पर वर्ष 2035 तक 82 अरब डालर का निवेश करेगा। इससे समुद्री नौवहन क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाई जाएगी और जलमार्गों का विकास किया जाएगा।

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