नई दिल्ली। सरकार जरूरत के हिसाब से और बैंकों के एकीकरण को भी तैयार है। वित्त राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने यह बात कही। पिछले साल सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों का विलय कुल चार बैंकों में करने की घोषणा की थी। इस प्रक्रिया से अप्रैल से छह वैश्वि आकार के बैंक अस्तित्व में आएंगे और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या घटकर 12 रह जाएगी, जो 2017 में 27 थी। ठाकुर ने बताया, ”हमने सफलता से बैंकों का विलय और पुन:पूंजीकरण किया है। दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) सफल रही है। इसके जरिये बैंकों को चार लाख करोड़ रुपये वापस मिले हैं। जरूरत के मुताबिक आगे और एकीकरण या विलय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एकीकरण के जरिये वैश्विक आकार के बैंक अस्तित्व आने से नरेंद्र मोदी सरकार के 2024-25 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। ठाकुर ने कहा कि बड़े बैंकों की पहुंच अधिक व्यापक होगी। उनकी ऋण देने की क्षमता बेहतर होगी और बढिय़ा उत्पादों और प्रौद्योगिकी के जरिये वे ग्राहकों को सेवाएं दे सकेंगे।
सरकार ने पिछले अगस्त में यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया और ओरियंटल बैंक आफ कामर्स का विलय पंजाब नेशनल बैंक में करने की घोषणा की थी। विलय के बाद बनने वाला बैंक सार्वजनिक क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा। इसके अलावा सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक और इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय करने की घोषणा की गई थी। इसी क्रम में आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक आफ इंडिया में विलय किया जाना है। अप्रैल, 2019 में बैंक आफ बड़ौदा ने विजया बैंक और देना बैंक का खुद में विलय किया था। जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की सूचीबद्धता के बारे में पूछे जाने पर ठाकुर ने कहा कि इससे इसमें अधिक पारदर्शिता आएगी और सार्वजनिक भागीदारी बढ़ेगी और शेयर बाजार की गहराई बढ़ेगी। ठाकुर ने इस साल के बजट को ‘जन जन का बजट’ करार देते हुए कहा कि इस समाज के सभी वर्गों का ख्याल रखा गया है।
जरूरत होने पर सरकार बैंकों के और एकीकरण को तैयार : ठाकुर
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